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सोना ही नहीं ‘काला सोना’ भी उगलेगी कटनी की धरती, कोयले के भंडार का पता चला, GSI सर्वे में जुटा

cy520520 2026-1-19 21:57:35 views 520
  

जमीन से कोयला एकत्र करते ग्रामीण।  



डिजिटल डेस्क, जबलपुर। चूना, लौह अयस्क, बॉक्साइड, मार्बल के बाद सोना उगलने वाली कटनी की धरती में अब काला सोना कहे जाने वाले कोयले के भंडार का पता चला है। बड़वारा तहसील के लुहरवारा में उमड़ार नदी के कटाव में मिले काले सोने के भंडार की जांच में जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) जुट गया है। प्रारंभिक सर्वे में अच्छी गुणवत्ता का कोयला सामने आया है।

उम्मीद है कि जल्द ही कटनी को कोयले की भी पहली खदान मिलेगी। कुछ समय पहले ही स्लीमनाबाद तहसील क्षेत्र के इमलिया गांव में जीएसआई के सर्वे में जमीन के नीचे छह हेक्टेयर से अधिक में सोने का भंडार मिला था। सोना खनन के लिए खनिज विभाग ने मुंबई की एक कंपनी से लीज अनुबंध किया है।
जारी वीडियो से सामने आई जानकारी

लुहरवारा गांव से होकर उमड़ार नदी गुजरती है। यहां पर नदी के कटाव क्षेत्र में लगातार काला पत्थर निकलने की जानकारी सामने आती रही है। ग्रामीणों ने इसके वीडियो बनाकर भी अधिकारियों को भेजे। इस आधार पर विभाग ने संज्ञान लिया और उसके बाद पांच सदस्यीय क्षेत्रीय प्रमुख भौमिकी व खनिकर्म जबलपुर की टीम जांच करने पहुंची। जिसमें GSI के विज्ञानी भी शामिल थे। दल ने मौके का सर्वे कर अलग-अलग सेंपल लिए, जिनको जांच के लिए लैब भेजा गया है। प्रारंभिक सर्वे में कोयला मिलने की पुष्टि हुई है।

  
थर्मल व स्टीम क्वालिटी का कोयला

सर्वे में कोयले की जो लेयर मिली है, उसमें थर्मल व स्टीम क्वालिटी का कोयला है, जिसकी गुणवत्ता काफी बेहतर है। वहीं यह कितने नीचे और क्षेत्रफल तक फैला है, इसके लिए उमड़ार नदी के कटाव क्षेत्र व आसपास के क्षेत्र में शुरुआती तौर पर लगभग 50 से 80 मीटर तक ड्रिलिंग कर यह जांच कराई जाएगी कि कोयले की कितनी लेयर मौजूद हैं। अभी तक कोल ब्लॉक का सटीक एरिया स्पष्ट नहीं है। प्रारंभिक अनुमान में बड़ा क्षेत्र बताया जा रहा है और परिणाम सकारात्मक रहे तो जल्द ही जिले को पहली बड़ी कोल माइंस मिलेगी।

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200 करोड़ से अधिक का देता है राजस्व

बेहतर खनिज की पहचान रखने वाले जिले में बड़वारा से ढीमरखेड़ा क्षेत्र में बाक्साइट, आयरन ओर और डोलोमाइट की उपलब्धता है। वहीं स्लीमनाबाद क्षेत्र में मार्बल की खदानें संचालित हैं। विजयराघवगढ़, कैमोर क्षेत्र में चूने का पत्थर बड़ी मात्रा में उपलब्ध हैं। जिले से अकेले खनिज से राज्य शासन को दो सौ करोड़ के लगभग का राजस्व हर साल जाता है।


बड़वारा के लुहरवारा में उमड़ार नदी के कटाव क्षेत्र में कोयले की सीम मिली है। जिसका प्रथम सर्वे किया गया है और सेंपल लिए गए हैं। प्राथमिक जांच में कोयले की अच्छी गुणवत्ता नजर आई है। सबकुछ सही रहा तो जिले को कोयले की पहली खदान मिलेगी। सर्वे के लिए क्षेत्र में जीएसआइ के जरिए ड्रिलिंग कराई जाएगी और उससे स्पष्ट होगा कोयला कितने नीचे और कितने क्षेत्र तक फैला है। साथ ही कोयले की ग्रेडिंग क्या है।
- रत्नेश दीक्षित, उपसंचालक, खनिज विभाग कटनी।
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