नई दिल्ली। बजट 2026 (Budget 2026) की सुगबुगाहट शुरू हो चुकी है। इस बार नौकरीपेशा वर्ग (Salaried Class) की नजरें सबसे ज्यादा इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव पर टिकी होती हैं। बढ़ती महंगाई और घर-शिक्षा के खर्चों के बीच एक्सपर्ट्स ने सरकार को एक बड़ा सुझाव दिया है, जो मिडिल क्लास की जेब में ज्यादा पैसा बचा सकता है।
₹24 लाख नहीं, ₹35 लाख हो लिमिट
मौजूदा समय में ₹24 लाख से ज्यादा की सालाना कमाई पर 30% का टैक्स स्लैब लग जाता है। टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि महंगाई को देखते हुए यह लिमिट अब पुरानी हो चुकी है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
ग्रांट थॉर्नटन भारत (Grant Thornton Bharat) के अखिल चंदना का सुझाव है कि 30% टैक्स स्लैब की सीमा को बढ़ाकर ₹35 लाख कर दिया जाना चाहिए। इससे \“ब्रैकेट क्रीप\“ (Bracket Creep) की समस्या खत्म होगी। यानी जब सैलरी तो बढ़ती है लेकिन महंगाई और ऊंचे टैक्स स्लैब के कारण असली कमाई (Purchasing Power) नहीं बढ़ती।
महंगाई ने तोड़ी कमर, टैक्स ने निचोड़ा
डीएम हरीश एंड कंपनी के पार्टनर अनिल हरीश का कहना है कि कम स्लैब होने के कारण फ्रेशर्स (जैसे नए इंजीनियर) भी बहुत जल्दी टॉप टैक्स ब्रैकेट में आ जाते हैं। इससे उन्हें लगता है कि टैक्स देश के विकास में योगदान नहीं, बल्कि एक \“जुर्माना\“ है। अगर टैक्स स्लैब महंगाई के हिसाब से एडजस्ट नहीं होते, तो आप अमीर नहीं हो रहे, बल्कि अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा बस टैक्स में दे रहे हैं।
अर्थव्यवस्था को कैसे होगा फायदा?
अगर सरकार टैक्स लिमिट बढ़ाती है, तो इसका सीधा असर बाजार पर दिखेगा। इससे लोगों के हाथ में ज्यादा पैसा (Disposable Income) बचेगा, तो लोग घर, गाड़ी और इलेक्ट्रॉनिक्स खरीदने में पैसा खर्च करेंगे। खपत बढ़ने से सरकार को इनडायरेक्ट टैक्स के जरिए वापस कमाई होगी।
सिर्फ स्लैब नहीं, ये भी हैं विकल्प
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर स्लैब नहीं बढ़ता है, तो सरकार को अन्य राहत देनी चाहिए जैसे स्टैंडर्ड डिडक्शन (Standard Deduction) की सीमा बढ़ाई जाए। वहीं होम लोन के ब्याज पर छूट की सीमा (जो अभी ₹2 लाख है) को रिवाइज किया जाए। हर 3-5 साल में महंगाई के आधार पर टैक्स स्लैब का ऑटोमेटिक रिव्यू जैसे घोषणा की जा सकती है।
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