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Bihar Land Records: जमीन के कागजात के लिए नई डिजिटल व्यवस्था लागू, अब चिरकूट का झंझट खत्म

LHC0088 2026-1-19 19:58:06 views 1257
  

verified land copy Bihar: भौतिक प्रणाली को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने किया समाप्त। सौ: इंटरनेट मीडिया  



जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। Bihar land records: बिहार में विवाद व भ्रष्टाचार से जुड़े सबसे अधिक मामले जमीन से संबद्ध हैं। नई सरकार ने इस दिशा में काम शुरू करते हुए जमीन के कागजात को प्राप्त करने की प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाया है।  

इसके लिए पुरानी व्यवस्थामें बड़ा बदलाव किया गया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने अब सत्यापित कापी कार्यालय से निर्गत करने की भौतिक प्रणाली को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। इसके स्थान पर अब डिजिटल हस्ताक्षरित कापी ही जारी की जाएगी, जो विधिक रूप से पूरी तरह मान्य होगी।

विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, अब भू-स्वामियों को जमीन के कागजात के लिए न तो चिरकूट (रसीद) लेने की जरूरत होगी और न ही उसे संभाल कर रखने की। यह नई व्यवस्था भू-अभिलेख पोर्टल के माध्यम से लागू की गई है। विभागीय सचिव ने सभी समाहर्ताओं को इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं।

अब तक की प्रक्रिया में आवेदकों को कार्यालय जाकर आवेदन देना पड़ता था, नाम-पता सहित पूरा विवरण भरना होता था और मामूली शुल्क जमा कर रसीद लेनी पड़ती थी। इसके बाद भी कागजात पाने के लिए बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते थे। इस परेशानी से भू-स्वामियों को राहत देने के लिए डिजिटल व्यवस्था लागू की गई है।

नई प्रणाली के तहत अब जमाबंदी, खतियान, खेसरा, दाखिल-खारिज समेत भूमि से जुड़े सभी अभिलेख ऑनलाइन आवेदन कर प्राप्त किए जा सकेंगे। ये डिजिटल कापियां बैंक, न्यायालय और अन्य सरकारी व गैर-सरकारी संस्थानों में पूरी तरह मान्य होंगी।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई अभिलेख ऑनलाइन उपलब्ध नहीं है, तो भू-स्वामी उसकी मांग पोर्टल पर दर्ज कर सकते हैं, जिसे शीघ्र उपलब्ध कराया जाएगा। उल्लेखनीय है कि राज्य में राजस्व अभिलेखों की स्कैनिंग का कार्य पहले ही पूरा किया जा चुका है और सभी दस्तावेजों को ऑनलाइन अपलोड करने के बाद यह नई व्यवस्था लागू की गई है।

इस पहल से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि आम लोगों को समय, श्रम और अनावश्यक भागदौड़ से भी छुटकारा मिलेगा। खासकर वैसे लोगों को बहुत फायदा होगा जो रोजी-रोजगार के क्रम में अपने पैतृक घर पर नहीं रह पा रहे हैं। उनके लिए बार-बार अपने अंचल कार्यालय का चक्कर काटना संभव नहीं था।
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