मोदी सरकार के बजट 2026 में स्टूडेंट्स के लिए क्या होगा खास?
जितेंद्र शर्मा, नई दिल्ली। यह आंकड़ा उत्साहित करता है कि भारत की लगभग 65 प्रतिशत आबादी युवा है। इसके कारण ही संभावना जताई जा रही है कि भारत विश्व का \“स्किल कैपिटल\“ बन सकता है, लेकिन इस उत्साह को सच उजागर करते यह आंकड़े हतोत्साहित भी कर रहे हैं कि बीते वर्षों में औपचारिक व्यावसायिक प्रशिक्षण प्राप्त करने वालों में 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग की भागीदारी अलग-अलग रिपोर्ट के अनुसार, मात्र दो से पांच प्रतिशत ही है।
इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि अलग से कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय बनाकर मोदी सरकार ने 2014 से इस दिशा में प्रयास तेज किए हैं, लेकिन सवाल उठता है कि धरातल पर क्या है! इसका परिणाम क्या रहा!
भारत में केवल 2-5% युवा ही औपचारिक कौशल प्रशिक्षण लेते हैं
शिक्षा को रोजगारपरक बनाने के प्रयास और कौशल विकास की ढेरों योजनाओं के बावजूद रोजगार-स्वरोजगार एक मुद्दा बना हुआ है।
दरअसल, मोदी सरकार सत्ता में आने के बाद से ही प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना यानी पीएमकेवीआइ की \“अंब्रेला स्कीम\“ के तहत कौशल विकास की विभिन्न योजनाएं चल रही हैं। यह भी सच है कि इसके अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने पर बार-बार इसमें संशोधन किया गया और वर्तमान में इसका चौथा चरण चल रहा है।
इसके तहत उद्योगों की आवश्यकता के अनुसार आइटीआइ व अन्य कौशल प्रशिक्षण संस्थानों में नए पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। औद्योगिक प्रशिक्षण को व्यावहारिक बनाने के लिए उद्योगों की भागीदारी बढ़ाई जाएगी।
इसके बावजूद इस चुनौती को कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय भी रेखांकित करता रहा है कि अभी भी उद्योग इतनी गंभीरता से सक्रिय नहीं हुए हैं। बदलती प्रौद्योगिकी के कारण स्किल गैप बना हुआ है।
चूंकि, विशेषज्ञों का जोर इस पर था कि शिक्षा और कौशल को एक ट्रैक पर लाते हुए शिक्षा को किताबी नहीं रखते हुए कौशल से जोड़कर युवाओं को रोजगार के कुशल बनाना होगा, इसीलिए सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लेकर आई। मगर, व्यावहारिक समस्या को आंकड़ों के माध्यम से समझा जा सकता है।
सकल नामांकन अनुपात 78 प्रतिशत
सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, दसवीं तक सकल नामांकन अनुपात 78 प्रतिशत है, जो बारहवीं तक का 58 प्रतिशत है तो स्नातक स्तर तक पहुंचते-पहुंचते 29 प्रतिशत रह जाता है।
इसी तरह समग्रता में बात करें तो भारत को विकसित बनाने के लिए युवा पीढ़ी को इससे कहीं अधिक गति से व्यावसायिक प्रशिक्षण से जोड़ना होगा।
जैसे कि भारत के दो से पांच प्रतिशत की तुलना में कोरिया में 96 प्रतिशत, जर्मनी में 75 प्रतिशत, जापान में 80 प्रतिशत तो यूनाइटेड ¨कगडम में यह 68 प्रतिशत तक है।
अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण करना होगा सुनिश्चित
अखिल भारतीय व्यावसायिक शिक्षा परिषद (एआइसीटीई) के वाइस चेयरमैन एमपी पूनिया का कहना है कि चूंकि स्कूली शिक्षा में अभी हमारे छात्र व्यावसायिक प्रशिक्षण नहीं ले रहे हैं, इसलिए विभिन्न परिस्थितियों के कारण जब बड़े पैमाने पर (करीब 69 प्रतिशत) छात्र उच्च शिक्षा नहीं ले पाते तो उन स्कूली शिक्षा स्तर के युवाओं के पास कोई हुनर नहीं होता।
उद्योग इन युवाओं को स्वीकार नहीं करते। वह मानते हैं कि जिस तरह सिंगापूर, ब्रिटेन आदि देशों में नौवीं कक्षा से कौशल प्रशिक्षण शुरू हो जाता है, वैसा ही यहां करना होगा। इसके साथ ही स्नातक स्तर पर 50 प्रतिशत अन्य पाठ्यक्रमों के साथ 50 प्रतिशत कौशल प्रशिक्षण की भागीदारी करनी होगी।
एमपी पूनिया कहते हैं कि सरकार को बजट बढ़ाने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि उस बजट का सही प्रबंधन करना है। नए पाठ्यक्रम बनाकर, एनईपी को अच्छे ढंग से लागू कर अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण सुनिश्चित करना होगा।
व्यावसायिक उत्पादकता से जुड़े शोध को मिल सकता है बढ़ावा
बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत की जनसांख्यिकीय शक्ति को भुनाते हुए मानव पूंजी तैयार करने पर सभी राज्यों के मुख्य सचिवों व विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श किया था।
इसमें शिक्षा विभाग के कार्यक्रमों पर विशेष चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार, सरकार पीएचडी के माध्यम से शोध कार्यक्रमों में बड़े बदलाव कर सकती है।
किसी भी मनचाहे विषय में शोध करने की बजाए ऐसे शोध को बढ़ावा दिया जा सकता है, जिनकी व्यावसायिक उत्पादकता हो।
एनईपी के लक्ष्यों के अनुसार, चूंकि वर्ष 2030 तक 50 प्रतिशत युवाओं को कौशल से जोड़ना है, इसलिए शिक्षण संस्थानों में रिसर्च पार्क, इनक्यूबेटर की स्थापना, नए युवाओं को बेहतर इन्सेंटिव आदि देकर उन्हें प्रशिक्षक के रूप में तैयार करने के लिए योजना ला सकती है।
उद्योगों की भागीदारी, नए कोर्स, अंतरराष्ट्रीय मानक आवश्यक
इसके अलावा संभावना है कि बिना कौशल प्रशिक्षण लिए शिक्षा से विरत हो चुके युवाओं को फिर से इस प्रक्रिया में जोड़ने के लिए हर ब्लाक में राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी संस्थान खोलने का निर्णय हो सकता है। ध्यान रहे कि सरकार का लक्ष्य 2035 तक उच्च शिक्षा के जीईआर को 50 प्रतिशत तक पहुंचाने का है।
सरकार को उद्योगों की कौशल प्रशिक्षण में भागीदारी बढ़ाने के लिए एमएसएमई को जोड़ना होगा। उन्हें अप्रेंटिसशिप कराने के लिए स्किल वाउचर देने चाहिए। इसके साथ ही जर्मनी माडल पर एक दिन की थ्योरी क्लास और पांच दिन का उद्योगों में प्रेक्टिकल क्लास शुरू करनी चाहिए। |
|