सांकेतिक तस्वीर।
जागरण संवाददाता, नया गुरुग्राम। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के 26 नवंबर 2025 के आदेश के पालन में सोमवार को टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (DTP) इन्फोर्समेंट कार्यालय में DLF Phase-1 से Phase-5 के निवासियों की ओर से उठाई गई अधिकार-क्षेत्र संबंधी आपत्तियों पर सुनवाई की गई। सुबह 10 बजे शुरू हुई इस सुनवाई में 100 से अधिक लोग उपस्थित रहे।
सुनवाई के दौरान निवासियों ने तर्क दिया कि डीएलएफ का पूरा क्षेत्र नगर निगम गुरुग्राम के अंतर्गत आता है, इसलिए यहां टाउन एंड कंट्री प्लानिंग एक्ट, 1963 लागू नहीं होता। उनका कहना था कि जब क्षेत्र नगर निगम के अधीन है, तो डीटीपी विभाग को किसी प्रकार की कार्रवाई का अधिकार नहीं है।
निवासियों ने यह भी कहा कि भवन नक्शे और ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट (ओसी) 1963 एक्ट के तहत जारी होते हैं, इसलिए विभाग का अधिकार-क्षेत्र नहीं बनता। इन आपत्तियों पर डीटीपी इन्फोर्समेंट ने विस्तार से स्थिति स्पष्ट की।
डीटीपीई ने बताया कि डीटीपी विभाग हरियाणा डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन आफ अर्बन एरियाज एक्ट 1975 के तहत कार्य करता है। इस अधिनियम की धारा-3 के अंतर्गत किसी भी भूमि को रिहायशी प्लाट्स में विकसित करने के लिए लाइसेंस जारी किया जाता है। डीएलएफ फेज-1 से फेज-5 इसी लाइसेंस प्रक्रिया के तहत विकसित किए गए क्षेत्र हैं।
डीटीपी ने स्पष्ट किया कि लाइसेंस जारी होने के बाद एक जोनिंग लेआउट प्लान स्वीकृत किया जाता है, जिसमें प्रत्येक प्लाट का उपयोग निर्धारित होता है। डीएलएफ क्षेत्र में सामने आए सभी उल्लंघन लाइसेंस की शर्तों, जोनिंग प्लान और 1975 एक्ट के प्रावधानों से जुड़े हैं।
स्वतंत्र मकानों के नक्शे हरियाणा बिल्डिंग कोड-2017 के तहत सेल्फ-सर्टिफिकेशन पाॅलिसी में पास किए जाते हैं। इस प्रक्रिया में नक्शे और आक्यूपेंसी सर्टिफिकेट आर्किटेक्ट द्वारा जारी किए जाते हैं। यदि इन नक्शों या ओसी में किसी भी प्रकार का नियम उल्लंघन पाया जाता है, तो वह सीधे तौर पर 1975 एक्ट का उल्लंघन माना जाएगा।
डीटीपी ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में धारा 3-बी के तहत कार्रवाई करने का अधिकार केवल निदेशक, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग या उनके द्वारा अधिकृत अधिकारी को ही प्राप्त है। अपने अधिकार-क्षेत्र को स्पष्ट करने के लिए डीटीपी इन्फोर्समेंट ने न्यायालयों के महत्वपूर्ण फैसलों का भी हवाला दिया।
इसमें शिवा आइस फैक्ट्री बनाम हरियाणा सरकार मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि लाइसेंस प्राप्त काॅलोनियों में, चाहे वे नगर निगम क्षेत्र में ही क्यों न हों, 1975 एक्ट के तहत डीटीपी विभाग को कार्रवाई का पूरा अधिकार है।
इस फैसले के विरुद्ध दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने भी खारिज कर दिया था। इसी प्रकार एक्सटिका कंडोमिनियम ओनर्स एसोसिएशन बनाम आरएस बिजनेस साल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड मामले में भी हाईकोर्ट के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया।
डीटीपी ने रजत कुच्चल बनाम हरियाणा सरकार मामले को लेकर फैली गलतफहमी को भी स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि इस मामले में अदालत ने कहा था कि नगर निगम क्षेत्र के भीतर 1963 एक्ट लागू होगा, लेकिन यह आदेश लाइसेंस स्वीकृत कालोनियों पर लागू नहीं होता, जो कि 1975 एक्ट के अधीन आती हैं। 1975 का अधिनियम लाइसेंस प्राप्त क्षेत्रों पर लागू होता है चाहे वह क्षेत्र नगर निगम के अधीन ही क्यों न आता हो।
डीएलएफ फेज-1 से फेज-5 एक लाइसेंस एरिया है और यहां पाए गए सभी उल्लंघन 1975 एक्ट एवं लाइसेंस शर्तों से संबंधित हैं। इसलिए इस क्षेत्र में डीटीपी विभाग का अधिकार-क्षेत्र पूरी तरह बनता है और विभाग द्वारा की जा रही कार्रवाई कानून के अनुसार पूरी तरह वैध है।
सुनवाई के दौरान लोगों को अपनी आपत्तियां रखने का पूरा अवसर दिया गया और उनकी शंकाओं का समाधान किया गया। सुनवाई के बाद इस मामले में एक काॅमन स्पीकिंग ऑर्डर पारित किया जाएगा, जिसे अधिकार-क्षेत्र को लेकर आपत्ति उठाने वाले सभी लोगों को भेजा जाएगा। इसकी एक प्रति हाईकोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट के रूप में भी दाखिल की जाएगी।
- अमित मधोलिया, डीटीपीई, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग
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