Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Makar Sankranti 2026: हर साल सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश करने की तिथि पर मकर संक्रांति मनाई जाती है। मकर संक्रांति के दिन सूर्य उत्तरायण होते हैं। इस शुभ अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा समेत उनकी सहायक नदियों में आस्था की डुबकी लगाते हैं। साथ ही पूजा, जप-तप और दान-पुण्य करते हैं।
पितरों को मोक्ष दिलाने हेतु बहती जलधारा में तिलांजलि भी की जाती है। साथ ही पितरों का तर्पण किया जाता है। साल 2026 में मकर संक्रांति की तिथि को लेकर लोग दुविधा में हैं। आइए, मकर संक्रांति की तिथि और शुभ मुहूर्त एवं पूजा विधि जानते हैं-
मकर संक्रांति तिथि
वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि यानी 14 जनवरी को मकर संक्रांति है। इस दिन पुण्य काल दोपहर 03 बजकर 13 मिनट से लेकर शाम 05 बजकर 45 मिनट तक है। इसके साथ ही महा पुण्य काल दोपहर 03 बजकर 13 मिनट से लेकर शाम 04 बजकर 57 मिनट तक है। मकर संक्रांति के दिन पुण्य क्षण दोपहर 03 बजकर 13 मिनट पर है। इस दौरान पूजा और दान करने से सूर्य देव की विशेष कृपा प्राप्त होगी। भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा ने भी इसकी पुष्टि की है।
सूर्य राशि परिवर्तन
ज्योतिषियों की मानें तो 14 जनवरी (अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार) को दोपहर 03 बजकर 43 मिनट पर सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश के दिन मकर संक्रांति मनाई जाती है। अतः साल 2026 में मकर संक्रांति 14 जनवरी के दिन मनाई जाएगी।
पूजा विधि
मकर संक्रांति का पर्व देशभर में उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाता है। इस दिन ब्रह्म बेला में उठें और घर की अच्छे से साफ-सफाई करें। नित्य कार्यों से निवृत्त होने के बाद गंगाजल युक्त पानी से स्नान करें। सुविधा होने पर गंगा नदी या सरोवर में स्नान करें। इस समय आचमन कर स्वयं को शुद्ध करें और पीले वस्त्र धारण करें। इसके बाद सूर्य देव को जल का अर्घ्य दें। इसी समय अंजलि में तिल लेकर बहती जलधारा में तिल प्रवाहित करें। इसके बाद विधि विधान से सूर्य देव की पूजा करें। पूजा के समय सूर्य चालीसा का पाठ करें। अंत में आरती कर सूर्य देव से सुख, शांति और धन वृद्धि की कामना करें। पूजा समापन के बाद आर्थिक स्थिति के अनुरूप दान दें।
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