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Republic Day 2026 Speech: गणतंत्र दिवस पर कविताओं से लैस बेहतरीन भाषण, सुनकर सभी हो जाएंगे मुरीद

deltin33 2026-1-19 14:27:19 views 1251
  

Republic Day 2026



एजुकेशन डेस्क, नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस हमारे देश का एक राष्ट्रीय त्योहार है जो प्रतिवर्ष 26 जनवरी को बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस बार देश अपना 77वां गणतंत्र दिवस (77th Republic Day 2026) सेलिब्रेट कर रहा है जिसकी तैयारियों स्कूल/ कॉलेजों में अभी से स्टार्ट हो गई हैं। इस दिन पर भाषण, कविता मंचन सहित विभिन्न प्रोग्राम्स का आयोजन किया जाता है।
अगर आप भी इस बार गणतंत्र दिवस पर भाषण देना चाहते हैं तो यह पेज आपके लिए बेहद उपयोगी है। आप यहां से कविताओं से लैस एक बेहतरीन भाषण तैयार कर सकते हैं। इस स्पीच के बाद अवश्य ही आपका तालियों से अभिवादन किया जायेगा।
Republic Day 2026 Speech in Hindi: गणतंत्र दिवस पर भाषण

नमस्कार, मैं......(नाम), आज राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस के पावन मौके पर यहां पर उपस्थित सभी महानुभावों/ अतिथिगण/ टीचर एवं सभी भैया बहनों का अभिवादन करता हूं। जैसे कि हम सभी जानते हैं कि हम यहां पर देश के 76वें गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में यहां उपस्थित हुए हैं। आज ही के दिन 1950 में भारत ने अपने संविधान को अपनाया और एक संप्रभु गणराज्य के रूप में अस्तित्व में आया। इस वर्ष भारत गणतंत्र देश के रूप में 77वें वर्ष में प्रवेश कर गया है। इन 77 वर्षों के अंदर ही हमारा देश दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक बनकर सामने आया है।

हमारे देश के संविधान को डॉ. भीमराव अंबेडकर के नेतृत्व में संविधान सभा ने तैयार किया था। डॉ. अंबेडकर के अलावा इस संविधान सभा में जवाहरलाल नेहरू, डॉ राजेन्द्र प्रसाद, सरदार वल्लभ भाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद, पंडित गोविंद बल्लभ पंत, आचार्य जेबी कृपलानी, शरत चंद्र बोस, सच्चिदानंद सिन्हा थे। इस संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे।

संविधान को तैयार करने में 2 वर्ष 11 माह 18 दिन लगे थे। भारत का संविधान 26 नवंबर 1949 को राष्ट्र को समर्पित कर दिया गया था। इसके दो माह बाद 26 जनवरी 1950 को इसे देशभर में लागू कर दिया गया।

  

(Image-freepik)

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए मैं एक कविता सुनाने वाला हूं

  • देखो फिर से गणतंत्र दिवस आ गया,
  • जो आते ही हमारे दिलो-दिमाग पर छा गया।
  • यह है हमारे देश का राष्ट्रीय त्यौहार,
  • इसलिए तो सब करते हैं इससे प्यार।
  • इस अवसर का हमें रहता विशेष इंतजार,
  • क्योंकि इस दिन मिला हमें गणतंत्र का उपहार।
  • आओ लोगों तक गणतंत्र दिवस का संदेश पहुचाएं,
  • लोगों को गणतंत्र का महत्व समझाएं।
  • गणतंत्र द्वारा भारत में हुआ नया सवेरा,
  • इसके पहले तक था देश में तानाशाही का अंधेरा।
  • क्योंकि बिना गणतंत्र देश में आ जाती है तानाशाही,
  • नहीं मिलता कोई अधिकार वादे होते हैं हवा-हवाई।
  • तो आओ अब इसका और ना करें इंतजार,
  • साथ मिलकर मनाये गणतंत्र दिवस का राष्ट्रीय त्यौहार।।


हमारा संविधान दुनिया का सबसे बेहतरीन संविधान माना जाता है क्योंकि इसमें गरीब हो अमीर सभी के लिए स्वतंत्रता, समानता और न्याय का अधिकार देता है। संविधान में किसी भी प्रकार की ऊंच नीच को स्थान नहीं दिया गया है जो मजबूत राष्ट्र को मजबूती प्रदान करता है। यह दिन हमें हमारे अधिकारों और कर्तव्यों की याद दिलाता है और सभी लोगों के प्रति समान व्यवहार करने का उचित पाठ पढ़ाता है।

  

(Image-freepik)

अंत में मैं एक हरिवंश राय बच्चन की एक कविता से अपनी वाणी को विराम देना चाहता हूं-

  • एक और जंजीर तड़कती है, भारत मां की जय बोलो
  • इन जंजीरों की चर्चा में कितनों ने निज हाथ बंधाए,
  • कितनों ने इनको छूने के कारण कारागार बसाए,
  • इन्हें पकड़ने में कितनों ने लाठी खाई, कोड़े ओड़े,
  • और इन्हें झटके देने में कितनों ने निज प्राण गंवाए!
  • किंतु शहीदों की आहों से शापित लोहा, कच्चा धागा।
  • एक और जंजीर तड़कती है, भारत मां की जय बोलो।


जय बोलो उस धीर व्रती की जिसने सोता देश जगाया,
जिसने मिट्टी के पुतलों को वीरों का बाना पहनाया,
जिसने आज़ादी लेने की एक निराली राह निकाली,
और स्वयं उसपर चलने में जिसने अपना शीश चढ़ाया,
घृणा मिटाने को दुनिया से लिखा लहू से जिसने अपने,
जो कि तुम्हारे हित विष घोले, तुम उसके हित अमृत घोलो।
एक और जंजीर तड़कती है, भारत मां की जय बोलो।


  • कठिन नहीं होता है बाहर की बाधा को दूर भगाना,
  • कठिन नहीं होता है बाहर के बंधन को काट हटाना,
  • ग़ैरों से कहना क्या मुश्किल अपने घर की राह सिधारें,
  • किंतु नहीं पहचाना जाता अपनों में बैठा बेगाना,
  • बाहर जब बेड़ी पड़ती है भीतर भी गाँठें लग जातीं,
  • बाहर के सब बंधन टूटे, भीतर के अब बंधन खोलो।
  • एक और जंजीर तड़कती है, भारत मां की जय बोलो।

कटीं बेड़ियां औ’ हथकड़ियां, हर्ष मनाओ, मंगल गाओ,
किंतु यहां पर लक्ष्य नहीं है, आगे पथ पर पांव बढ़ाओ,
आजादी वह मूर्ति नहीं है जो बैठी रहती मंदिर में,
उसकी पूजा करनी है तो नक्षत्रों से होड़ लगाओ।
हल्का फूल नहीं आजादी, वह है भारी जिम्मेदारी,
उसे उठाने को कंधों के, भुजदंडों के, बल को तोलो।
एक और जंजीर तड़कती है, भारत मां की जय बोलो।


धन्यवाद, जय हिन्द जय भारत, भारत माता की जय।

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