मृत्युंजय मिश्र, प्रयागराज। माघ मेले की पुण्यभूमि पर मौनी अमावस्या का पावन पर्व आस्था, परंपरा और आधुनिक तकनीक का अद्भुत संगम बना। तड़के ब्रह्ममुहूर्त से ही गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम तट पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा।
करोड़ों लोगों ने पवित्र संगम में आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित किया। धर्म और आध्यात्म की इस विराट अनुभूति की गूंज सिर्फ संगम तट तक सीमित नहीं रही बल्कि इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्स’ पर भी लगातार ट्रेंड करता रहा।
इसके साथ ही स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान को लेकर हुआ विवाद भी टाप ट्रेंड में रहा। किसी ने संतों का अपमान बताया तो किसी ने इसे व्यवस्था का हिस्सा बताकर पुलिस की कार्रवाई का समर्थन किया।
मौनी अमावस्या को सनातन परंपरा में विशेष महत्व प्राप्त है। मान्यता है कि इस दिन मौन रहकर स्नान और दान करने से मन, वचन और कर्म की शुद्धि होती है। इसी आस्था के साथ देश-विदेश से आए श्रद्धालु संगम तट पहुंचे।
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साधु-संतों, अखाड़ों के संन्यासियों, कल्पवासियों और गृहस्थ श्रद्धालुओं ने एक साथ संगम में स्नान कर आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया। हर-हर गंगे और हर-हर महादेव के जयघोष से पूरा मेला क्षेत्र गूंज उठा। इस पावन अवसर की झलक इंटरनेट मीडिया पर भी खूब देखने को मिली।
श्रद्धालुओं ने संगम स्नान की तस्वीरें, वीडियो और अपने अनुभव साझा किए, जिसके चलते मौनी अमावस्या दिनभर एक्स सहित अन्य सभी इंटरनेट मीडिया मंचों पर ट्रेंड करती रही।
लोगों ने स्नान की तस्वीरें, संगम तट पर उमड़ी अपार भीड़, उल्लास से भी फोटो और वीडियो पोस्ट कर माघ मेले की दिव्यता और भव्यता की सराहना की।
कल्पवासियों के शिविरों में भजन-कीर्तन, प्रवचन और यज्ञ का आयोजन हुआ। मौनी अमावस्या ने एक बार फिर प्रयागराज को विश्व पटल पर आस्था की राजधानी के रूप में स्थापित किया। |