राज्य ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड में उत्पादित नींबू वर्गीय फलों को बढ़ावा देने पर सरकार ने ध्यान केंद्रित करने की ठानी है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री ने राज्य में माल्टा मिशन की घोषणा की है।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने विभाग को इस मिशन को धरातल पर उतारने के दृष्टिगत इसकी नीति का प्रारूप जल्द तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इस कड़ी में विभाग कसरत में जुट गया है। नीति में माल्टा, गलगल समेत अन्य नींबू की पारंपरिक प्रजातियों को ही बढ़ावा देने पर विशेष जोर रहेगा।
राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर माल्टा समेत नींबू वर्गीय फलों का उत्पादन होता है, लेकिन इनका अपेक्षित लाभ स्थानीय निवासियों को नहीं मिल पा रहा है। हर साल ही बड़े पैमाने पर माल्टा व नींबू यूं ही बरबाद हो जाता है।
यद्यपि, सरकार ने सी ग्रेड के माल्टा व गलगल का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किया है, लेकिन इसमें भी खरीद न के बराबर ही हो पाती है। इस सबको देखते हुए सरकार ने अब माल्टा व नींबू वर्गीय फलों को बढ़ावा देने का निश्चय किया है। इसी क्रम में हाल में माल्टा महोत्सव की शुरुआत की गई। तब मुख्यमंत्री ने माल्टा मिशन की घोषणा की थी।
औद्यानिकी परिषद के सीईओ डा नरेंद्र यादव के अनुसार माल्टा मिशन के लिए नीति का प्रारूप तैयार किया जा रहा है। इसके लिए सभी क्षेत्रों से जानकारी ली गई गई है।
साथ ही प्रयास रहेगा कि नींबू वर्गीय फलों को सभी जिलों में बढ़ावा दिया जाए। इसमें स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप नींबू प्रजातियों के उत्पादन पर जोर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि जल्द ही नीति का प्रारूप तैयार कर शासन को भेजा जाएगा। |
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