यमुना का जलस्तर घटने से बिजली उत्पादन प्रभावित। फोटो जागरण
संवाद सहयोगी, प्रतापनगर। पहाड़ों में लगातार हो रही बर्फबारी का असर यमुना नदी के जलस्तर पर पड़ रहा है। नदी के हथनीकुंड बैराज पर जल बहाव में गिरावट आई है। इसका सीधा असर बिजली उत्पादन पर पड़ रहा है। संबंधित नहरों में भी मांग के अनुसार पानी की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। बर्फ पिघलने के बाद जलस्तर में बढ़ोतरी होगी।
हथनीकुंड बैराज पर रविवार सुबह आठ बजे 1836 क्यूसेक, दस बजे 2825 क्यूसेक, दोपहर 12 बजे 3767 क्यूसेक, शाम चार बजे 2249 क्यूसेक और शाम पांच बजे 2169 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया। इसमें से यमुना नदी में 352 क्यूसेक, पश्चिमी यमुना नहर में 1660 क्यूसेक व पूर्वी यमुना नहर में 149 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
पश्चिमी यमुना नहर पर स्थित चार बिजली उत्पादन इकाइयों को नियमित रूप से संचालित रखने के लिए लगभग 5400 क्यूसेक पानी की आवश्यकता होती है। चारों इकाइयों में कुल आठ मशीनें स्थापित हैं। पानी की आपूर्ति कम होने की स्थिति में प्रत्येक इकाई की एक-एक मशीन को बंद करना पड़ता है जिससे उत्पादन क्षमता घट जाती है। पर्याप्त पानी नहीं मिलने से सभी मशीनें पूरी क्षमता से नहीं चल पा रही हैं।
हाइडल प्रोजेक्ट से मिली जानकारी के अनुसार पानी की कमी के कारण केवल करीब 30 प्रतिशत बिजली उत्पादन ही किया जा रहा है। इसका असर बिजली आपूर्ति पर भी प्रभाव पड़ रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक पहाड़ों में जमी बर्फ पिघलकर पानी का प्रवाह नहीं बढ़ता, तब तक हालात में सुधार की संभावना कम है।
संभावना जताई जा रहा है कि फरवरी माह तक हथनीकुंड बैराज पर पानी की आवक में कमी रह सकती है, जिससे हाइडल बिजली उत्पादन प्रभावित रहेगा। |
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