सीएचसी में विलाप करती मृतक की पत्नी तरन्नुम। जागरण
संवाद सूत्र, जागरण. सरधना (मेरठ)। मेरठ-करनाल हाईवे पर शनिवार को मोपेड सवार युवक को अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी। पुलिस गंभीर हालत में उसे सरधना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) लाई। चिकित्सकों ने उसे मेडिकल कालेज रेफर कर दिया। घायल को ले जाने को एंबुलेंस का इंतजार होता रहा। दो घंटा 23 मिनट तक तड़पने के बाद आखिर घायल ने दम तोड़ दिया। युवक की मौत के एक घंटा 40 मिनट बाद एंबुलेंस सीएचसी पहुंची। घायल को मेडिकल कालेज भेजने को न तो सीएचसी प्रभारी न ही पुलिस ने कोई प्रयास किए।
सूचना के साढ़े तीन घंटे की देरी से एंबुलेंस सीएचसी पहुंची। शामली निवासी 30 वर्षीय गुल मोहम्मद पुत्र शमशाद वर्तमान में जिला बागपत के दोघट थाना क्षेत्र के गांव गढ़ी झुंडपुर में पत्नी तरन्नुम के साथ ससुराल में रहता था। वह कपड़ों की फेरी करता था। शनिवार को वह मोपेड पर कपड़ों की फेरी के लिए मेरठ जा रहा था। शाम को जब वह मेरठ-करनाल हाईवे के ग्राम बुबकपुर के पास पहुंचा, तभी एक अज्ञात वाहन ने उसे टक्कर मार दी। इसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया। सूचना पर डायल-112 मौके पर पहुंची तथा गुल मोहम्मद को सीएचसी में भर्ती कराया। उसने हेलमेट पहन रखा था।
चिकित्सक डा शशिकांत ने उसकी हालत देख तत्काल हायर सेंटर रेफर कर दिया। जिला अस्पताल या मेडिकल कालेज ले जाने को सीएचसी पर कोई एंबुलेंस नहीं थी। इस पर डा शशिकांत ने कंट्रोल रूम को फोन किया गया। डाक्टर के बाद तरन्नुम ने कंट्रोल रूम को फोन किया। आरोप है कि एंबुलेंस के व्यस्त होने की बात कही जाती रही। सीएचसी में ही तड़पते हुए गुल मोहम्मद ने दम तोड़ दिया।
चिकित्सक डा. शशिकांत ने बताया कि डायल-112 पुलिस उसे शाम 5:22 बजे सीएचसी लाई थी। 10 से 15 मिनट बाद ही उसे रेफर कर दिया गया था। शाम 6:45 बजे उसकी फिर हालत बिगड़ी। चिकित्सकों ने उसे उपचार दिया। शाम 7:45 बजे उसकी मौत हो गई। उन्होंने बताया कि उनके द्वारा शाम 5:37 बजे एंबुलेंस के लिए कंट्रोल रूम को सूचना दी गई पर एंबुलेंस रात सवा नौ बजे सीएचसी पहुंची।
मामले की जांच भी की जाएगी
यह गंभीर मामला है। एंबुलेंस इतनी देर से क्यों पहुंची। इसका कारण एंबुलेंस सेवा के कोआर्डिनेटर से पूछा जाएगा। मामले की जांच भी की जाएगी। डा. प्रताप सिंह खोखर, डिप्टी सीएमओ व नोडल अधिकारी एंबुलेंस सेवा
घटना ने खोल दी एंबुलेंस सेवा की पोल
सरधना की घटना ने एंबुलेंस सेवा की पोल खोल दी है। दावा 10 से 15 मिनट के भीतर एंबुलेंस पहुंचाने का होता है, लेकिन यहां तो 3.35 घंटे इंतजार करा दिया गया। घायल की सांसें टूट गईं उसके बाद पहुंची। हैरानी की बात ये है कि इस मामले की भनक सीएमओ कार्यालय को नहीं लगी। सरधना सीएचसी से मेडिकल कालेज करीब 28 किमी की दूरी पर है। यहां तक पहुंचने में लगभग 45 मिनट लगते। यदि एंबुलेंस समय पर पहुंच जाती तो शायद घायल की जान बच सकती थी। दुर्घटना के घायल के लिए गोल्डन आवर यानि दुर्घटना के बाद का पहला घंटा बहुत महत्वपूर्ण होता है। इसी अवधि में घायल को ट्रामा सेंटर का उपचार मुहैया हो जाए तो बचने की उम्मीद की जाती है। एंबुलेंस सेवा इसीलिए होती है। ताकि घायल को गोल्डन आवर में पहुंचाया जा सके।
जनपद में 108 एंबुलेंस 37 और 102 एंबुलेंस 38, एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबु़लेंस छह हैं। सभी में चालक के साथ एक इएमटी की तैनाती होती है। सरकारी एंबुलेंस में चालक के साथ एक इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन की ड्यूटी होती है। इनका काम रास्ते में प्री-हास्पिटल केयर करते हुए मरीज को सुरक्षित अस्पताल तक पहुंचाना है। आक्सीजन लगाना, घायलों को अत्यधिक ब्लीडिंग होने पर उसे रोकने के लिए पट्टी करना, अत्यधित दर्द होने पर तत्काल फोन करके इमरजेंसी रेस्पांस सेंटर फिजिशियन से बात करके मरीज की स्थिति के अनुसार दवा देने का प्रविधान भी होता है, लेकिन सीएचसी से रेफर घायल को यह सुविधाएं इसलिए नहीं मिल सकीं। क्योंकि एंबुलेंस ही नहीं पहुंची।
बच्चे के सिर से उठा पिता का साया
दो साल के बच्चे के सिर से उठा पिता का साया दुर्घटना की जानकारी पर स्वजन मौके पर पहुंचे। गुल मोहम्मद का दो वर्ष का बेटा आयान है। पत्नी व अन्य स्वजन का रो-रोकर बुरा हाल है। एंबुलेंस के नहीं आने व तड़पते हुए घायल की मौत के बारे में जब सीएचसी प्रभारी डा. संदीप गौतम से बात करने का प्रयास किया गया उन्होंने फोन नहीं उठाया। मोबाइल पर भेजे गए मैसेज का भी कोई जवाब नहीं आया। |
|