हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का शिमला स्थित परिसर। जागरण आर्काइव
विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के विपरीत शारीरिक शिक्षा अध्यापकों के पद पर नियुक्ति प्रदान करने बारे निर्धारित योग्यता में छूट देने से इन्कार कर दिया है। एकलपीठ ने एक वर्ष का शारीरिक शिक्षा का डिप्लोमा करने वाले अभ्यर्थियों को भी पीईटी के पदों के लिए पात्र ठहराने के आदेश दिए थे।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया व न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने एकलपीठ के फैसले को खारिज करते हुए कहा कि एकल न्यायाधीश द्वारा पारित विवादित निर्णय न्यायिक जांच की कसौटी पर खरा नहीं उतरता है और तदनुसार इसे निरस्त किया जाता है।
नियुक्त करने का निर्देश नहीं दिया जा सकता
खंडपीठ ने कहा कि एक बार की छूट दिए जाने पर याचिकाकर्ताओं को 125 पीईटी पदों में से 62 बैचवार पदों के लिए विधिवत विचार किया गया। भाग लेने के बाद भी असफल रहने पर उन्हें भविष्य की रिक्तियों के विरुद्ध दावा करने का कोई अधिकार नहीं है। याचिकाकर्ताओं को जो 10 जनवरी 2011 को अधिसूचित नए नियमों के तहत अपात्र थे, उन्हें इन पदों के विरुद्ध नियुक्त करने का निर्देश नहीं दिया जा सकता है।
भविष्य में रिक्त पदों पर नियुक्ति का कोई अधिकार नहीं
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरोज कुमार मामले में दिए फैसले का लाभ जिसमें याचिकाकर्ता पात्र नहीं थे, याचिकाकर्ताओं और अन्य समान अभ्यर्थियों को नहीं दिया जा सकता। यहां तक कि वर्ष 2011-12 में पीईटी के 125 पदों को भरने के लिए चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी याचिकाकर्ताओं और इसी तरह के अन्य लोगों को रिक्त या भविष्य में रिक्त पदों पर नियुक्ति का कोई अधिकार नहीं है।
न ही रिट न्यायालय वैधानिक नियमों को नजरअंदाज करते हुए इस तरह के निर्देश पारित कर सकता है कि याचिकाकर्ताओं को छूट दी जाए और भविष्य में रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए उन पर विचार किया जाए। कोई भी व्यक्ति या आवेदक सरकार को याचिकाकर्ताओं को पात्र अभ्यर्थियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। ऐसा करना “असमानों को समान मानना“ है, जो भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन होगा।
छूट अधिकार के रूप में नहीं मांगी जा सकती
कोर्ट ने कहा, छूट को भी अधिकार के रूप में नहीं मांगा जा सकता और ऐसी छूट राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आती है। बशर्ते पीईटी पद के लिए 2011 के वैधानिक नियमों के नियम 18 में निहित पूर्व शर्तों को पूरा किया जाए। खंडपीठ ने कहा कि एकलपीठ द्वारा 19 जुलाई 2022 को पारित किया निर्णय जिसमें राज्य अधिकारियों व अपीलकर्ताओं को निर्देश दिया गया है कि वे छूट दें और भविष्य में रिक्त पदों के विरुद्ध उन्हें शारीरिक शिक्षा शिक्षक के रूप में नियुक्त करने पर विचार करें, न्यायिक जांच की कसौटी पर खरा नहीं उतरता है और तदनुसार इसे निरस्त किया जाता है।
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