इस महाघोटाले का खुलासा 19 मार्च 2025 को हुआ था। जब कई ग्राहकों ने बैंक में पैसा जमा होने के बावजूद खातों में राशि न दिखने की शिकायत की, तब बैंक प्रशासन में हड़कंप मच गया। बैंक के अंचल प्रमुख (जोनल मैनेजर) तरुण कुमार विश्नोई ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जसराना थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। जांच में सामने आया कि यह 100 से अधिक ग्राहकों के साथ की गई 2.40 करोड़ रुपये से अधिक की बड़ी धोखाधड़ी थी।

पुलिस ने पहले चरण में बैंक कैशियर जयप्रकाश सिंह निवासी शक्तिनगर टूंडला सहित प्रवीन कुमार और इसके होमगार्ड पिता कुंवरपाल निवासी ग्राम भेंडी, जसराना, आकाश मिश्रा निवासी मोहल्ला कोठीपुरा, जसराना, वीर बहादुर निवासी शिवनगर, कचहरी रोड, मैनपुरी और सुखदेव सिंह निवासी बालाजीपुरम, हाईवे, मथुरा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। अदालत ने ट्रायल में इस मामले को सामान्य चोरी या हेराफेरी नहीं, बल्कि एक 'संगठित अपराध' माना।
कोर्ट ने माना कि दोषियों ने एक सुनियोजित गिरोह की तरह काम किया, जहां बैंक की मुहर और स्टेशनरी का इस्तेमाल कर जाली रसीदें बनाई गईं। कैशियर जयप्रकाश ने अपने पद की गरिमा को ताक पर रखकर ग्राहकों की गाढ़ी कमाई को हड़प लिया। साक्ष्यों व गवाही के आधार पर कोर्ट ने कैशियर जयप्रकाश को आजीवन कारावास व 5.50 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। साथ ही अन्य पांचों दोषियों को 10-10 साल की कैद और 5-5 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
मैनेजर सहित 4 अन्य पर लटकी तलवार
एसएसपी सौरभ दीक्षित ने बताया कि भले ही कैशियर और उसके साथियों को सजा मिल गई है, लेकिन इस घोटाले की आग अभी ठंडी नहीं हुई है। मामले में शाखा प्रबंधक (मैनेजर) राघवेंद्र सिंह, उसके साथी रवीश यादव, सोमिल, नीलेश के खिलाफ पुलिस की विवेचना (जांच) अभी भी प्रचलित है। विवेचक एवं थानाध्यक्ष जसराना राजेश कुमार पांडेय ने बताया कि पुलिस इनके खिलाफ भी साक्ष्य जुटा चुकी है और जल्द ही न्यायालय में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की जाएगी।
जयप्रकाश सिंह, प्रवीन कुमार, कुंवरपाल, आकाश मिश्रा, वीर बहादुर, सुखदेव सिंह के खिलाफ पुलिस ने जब चार्जशीट दाखिल की थी, उस वक्त तक यह मामला 91 ग्राहकों के खाते से 1.86 करोड़ रुपये हड़पने के मामले का था। इसके बाद की जो जांच प्रबंधक (मैनेजर) राघवेंद्र सिंह, उसके साथी रवीश यादव, सोमिल, नीलेश के खिलाफ प्रचलित है। उसमें अभी तक 2.40 करोड़ रुपये से अधिक के गबन का मामला प्रकाश में आ चुका है।
जनता का भरोसा तोड़ने वालों पर कोई नरमी नहींः कोर्ट
एडीजे-2 कोर्ट में जयप्रकाश सहित अन्य पांच आरोपियों पर दोष सिद्ध होने के बाद बचाव पक्ष ने होमगार्ड कुंवरपाल की 60 वर्ष से अधिक उम्र होने का हवाला देते हुए सजा में नरमी बरतने का अनुरोध किया था। मगर, कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट लिखा है कि बैंकिंग प्रणाली में भ्रष्टाचार और जनता के साथ धोखाधड़ी करने वालों के लिए यह फैसला एक मिसाल बनेगा। वित्तीय संस्थानों में जनता का भरोसा तोड़ने वालों के साथ कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।
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