search

CM धामी ने जागरण फोरम में बेबाकी से रखे विचार, बोले- देवभूमि के देवत्व की रक्षा करेंगे, छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं

deltin33 2026-1-18 10:26:22 views 695
  

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी। जागरण  



राज्य ब्यूरो, जागरण, देहरादून। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में किया गया समान नागरिक संहिता का वादा धरातल पर उतर चुका है तो सरकारी विभागों में रिक्त पदों पर 27 हजार नौकरियां युवाओं के खाते में आ चुकी हैं। वायदों को धरातल पर उतारने में पूरी शक्ति झोंक रहे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को यह अहसास है कि आगे विधानसभा चुनाव की नई चुनौती मुंहबाए खड़ी है।

वायदे पूरे करने के जोश से लबरेज धामी ने कहा कि देवभूमि का देवत्व और उसकी सांस्कृतिक व जनसांख्यिकीय पहचान बनी रहनी चाहिए। इसे सुरक्षित रखने का संकल्प व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि इस स्वरूप से छेड़छाड़ को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मुख्यमंत्री धामी शनिवार को होटल फेयरफील्ड बाय मैरियट होटल में आयोजित जागरण फोरम में देवभूमि सत्र: माटी के संदेश के अंतर्गत संवाद कार्यक्रम में भाग लेने के दौरान पूरी रौ में दिखे। संवाद के दौरान उन्होंने न केवल सरकार की नीतियों और निर्णयों की पृष्ठभूमि स्पष्ट की, बल्कि राज्य के भविष्य को लेकर सरकार की स्पष्ट सोच और प्रतिबद्धता को भी सामने रखा।  

अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री धामी ने नाम लिए बगैर कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि एक विपक्षी पार्टी को

प्रदेश की प्रगति बिल्कुल नहीं सुहाती। फेक नैरेटिव, झूठ और अफवाह को आधार बनाकर बवाल मचाने या भड़काने की राजनीति की जा रही है। एक कथित पति-पत्नी के बीच आडियो बातचीत को आधार बनाकर जानबूझकर भ्रमजाल फैलाने का प्रयास किया गया।

प्रदेश सरकार ने यह तय किया कि अंकिता के माता-पिता जो चाहेंगे, उसी अनुरूप निर्णय किया जाएगा। इसीलिए सीबीआइ जांच की संस्तुति की गई। इससे पहले एक महिला पुलिस अधिकारी के नेतृत्व में एसआइटी गठित कर हत्याकांड की जांच कराई गई। इसी जांच के आधार पर आरोपितों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

एसआइटी जांच को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट सही ठहरा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे प्रयासों के कारण ही जनता ने पहले बिहार विधानसभा चुनाव और अब महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनाव में विपक्षी पार्टी को हाशिये पर पहुंचा दिया। आने वाले विधानसभा चुनाव में यही फिर दोहराया जाएगा।  

मुख्यमंत्री धामी ने समान नागरिक संहिता को लागू करने के ऐतिहासिक निर्णय पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह निर्णय किसी वर्ग विशेष के विरुद्ध नहीं, बल्कि सामाजिक समानता, न्याय और महिला सशक्तिकरण की दिशा में उठाया गया एक निर्णायक कदम है। उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना है, जिसने समान नागरिक संहिता को लागू करने का साहसिक निर्णय लिया।

यह निर्णय वर्षों से चली आ रही सामाजिक असमानताओं को समाप्त करने और एक समरस समाज की स्थापना की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस कानून को लागू करने से पहले व्यापक विचार-विमर्श और संवैधानिक पहलुओं का गहन अध्ययन किया गया।

यह भी पढ़ें- Shri Rudranath Temple: सिर्फ 140 तीर्थ यात्री ही करते हैं रोजाना यहां दर्शन, 18 को खुलेंगे कपाट; एडवाइजरी जारी

मुख्यमंत्री ने मदरसा बोर्ड को भंग करने के निर्णय पर कहा कि राज्य में शिक्षा का माध्यम ऐसा होना चाहिए, जो बच्चों को आधुनिक ज्ञान, कौशल और राष्ट्रीय मुख्यधारा से जोड़ सके। यह निर्णय किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने और बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में उठाया गया कदम है।

लैंड जिहाद और लव जिहाद जैसे गंभीर विषयों पर राज्य सरकार के सख्त और स्पष्ट रुख को सामने रखा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक संरचना और जनसांख्यिकी को सुरक्षित रखना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

इन विषयों पर कड़े कानून और प्रभावी कार्रवाई के माध्यम से यह संदेश दिया है कि राज्य की भूमि, समाज और संस्कृति के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार कानून के दायरे में रहकर कठोरतम कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है।
like (0)
deltin33administrator

Post a reply

loginto write comments
deltin33

He hasn't introduced himself yet.

1510K

Threads

0

Posts

4710K

Credits

administrator

Credits
477649