एक दशक बाद दिल्ली में अरब लीग विदेश मंत्रियों की बैठक (फाइल फोटो)
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। दस वर्षों के अंतराल के बाद भारत और अरब लीग के विदेश मंत्रियों का दूसरा प्रमुख संवाद इस महीने के अंत में दिल्ली में होने जा रहा है। 30 और 31 जनवरी को आयोजित यह बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता चरम पर है।
गाजा संकट, ईरान-इजराइल तनाव, लाल सागर में शिपिंग सुरक्षा की चुनौतियां और बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों ने दुनिया को नई चुनौतियां दी हैं। इसी पृष्ठभूमि में भारत और अरब देशों की तरफ से आपसी संबंधों को नए आयाम देने, रणनीतिक साझेदारी को गहरा करने और आर्थिक-सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने की कोशिश होगी।
इस बैठक में खाद्य सुरक्षा और श्रम के आदान-प्रदान का मुद्दा भी प्रमुखता से उठेगा।मिस्त्र के दौरे पर गये विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्द्धन सिंह ने भारत-अरब देशों के विदेश मंत्रियों की आगामी बैठक को लेकर अरब लीग के महासचिव अहमद अब्दुल घईत और विदेश मंत्री बदर अब्दलत्ती से बात भी की है।
कूटनीतिक सूत्रों ने बताया कि आगामी बैठक में अरब लीग के 22 सदस्य देशों में से करीब 20 के विदेश मंत्रियों की तरफ से बैठक में हिस्सा लिये जाने की संभावना है। इसमें सऊदी अरब, मिस्त्र, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), जॉर्डन, अल्जीरिया और मोरक्को जैसे प्रभावशाली देश प्रमुख हैं। बैठक में राजनीतिक परामर्श, ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार विस्तार, आतंकवाद विरोधी सहयोग और भारतीय प्रवासियों की भलाई जैसे मुद्दों पर गहन चर्चा होने की उम्मीद है।
दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था
दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत इन देशों को अपनी भावी आर्थिक प्रगति के लिए जरूरी मान रहा है। भारत और अरब लीग के देशों के बीच संबंध प्राचीन काल से हैं लेकिन दोनों तरफ से इसमें बदलाव की जरूरत महूसस की जा रही है। भारत और अरब देशों के बीच 240 अरब डॉलर से अधिक का कारोबार होता है।
भारत अपनी जरूरत का 60 फीसद कच्चा तेल और 50 फीसद उर्वरक इन देशों से आयात करता है। लिहाजा कहा जा सकता है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा के लिए अरब देश काफी महत्वपूर्ण हैं। इसके अलावा खाड़ी क्षेत्र में 90 लाख से अधिक भारतीय काम कर रहे हैं, जो वहां से विदेशी मुद्रा भारत भेजते हैं। यह भारत की विदेशी मुद्रा प्रबंधन के लिए जरूरी है।
वैश्विक अनिश्चितता की वजह से अरब लीग के कई देश अपना सैन्य बजट बढ़ा रहे हैं। ऐसे में भारत के विशाल रक्षा उद्योग के लिए वहां नई संभावनाएं बनने की उम्मीद है। इस तरह की पहली बैठक 24 जनवरी 2016 को बहरीन की राजधानी मनामा में हुई थी, जहां तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने हिस्सा लिया था।
उस बैठक में अरब-भारत सहयोग फोरम की स्थापना पर सहमति बनी, जिसके तहत नियमित राजनीतिक परामर्श, व्यापार और सांस्कृतिक कार्यक्रम शुरू हुए। तब से दोनों पक्षों के बीच संपर्क बढ़ा है। चीन भी इसी साल अरब देशों के साथ अपना दूसरा शिखर सम्मेलन आयोजित करने वाला है। विदेश मंत्रालय ने इस बारे में नवंबर 2025 में अरब देशों के नई दिल्ली स्थित राजदूतों के साथ परामर्श किया था। अब अरब लीग महासचिव के साथ चर्चाएं हो चुकी हैं।
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