कोहरे के चलते प्रतापगढ़ में भीषण सड़क हादसा में घायलों की संगम स्नान की अधूरी रह गई मंशा।
राज नारायण शुक्ल राजन, प्रतापगढ़। Pratapgarh Accident कोहरे के दौरान पिकअप पलटी तो हर कोई अपनी चोटों को भूल अपने परिवार के सदस्य की चिंता में परेशान हो गया। किसी का पैर दब गया तो किसी का सिर। किसी महिला की साड़ी फंस गई तो किसी का झोला दूसरे पर गिर गया। खून फैला था और चीख-पुकार मची थी। कोई अपने पिता को लेकर परेशान था तो कोई अपने बच्चों को ढूंढ रहा था। सर्दी की सुबह होने से काफी देर तक मदद के लिए कोई नहीं पहुंच सका। तब तक सड़क पर ही गद्दे डालकर घायलों को लेटा दिया गया। उसमें कई दर्द से तड़प रहे थे। घटना स्थल पर दोनों वाहनों के आगे के कांच टूटकर कंकड़ की तरह बिखर गए थे।
कोहरे के चलते हुआ हाईवे पर हादसा
Pratapgarh Accident मौनी अमावस्या पर गंगा स्नान करने के लिए प्रयागराज जा रहे स्नानार्थियों से भरी पिकअप को कोहरे के चलते प्राइवेट बस ने प्रयागराज-अयोध्या हाईवे पर जोगापुर में पीछे से टक्कर मार दी। इस हादसे में लोहरौली सांथा, संत कबीर नगर के 23 स्नानार्थी घायल हो गए। इनमें सात महिलाएं व तीन बच्चे भी हैं। पांच लोगों को अधिक चोट लगी, अन्य को तेज झटका लगा। पुलिस व एंबुलेंस कर्मियों के साथ स्थानीय ग्रामीणों ने राहत व बचाव कार्य में तत्परता दिखाते हुए घायलों को राजा प्रताप बहादुर अस्पताल पहुंचाया। संत कबीर नगर के एक ही गांव के 37 लोग मालवाहक पिकअप पर मचान बनाकर ऊपर-नीचे बैठे थे।
‘गंगा माई बचाइ लिहिन, हम तौ जाने मरि जाब...’
Pratapgarh Accident गंगा माई बचाइ लिहिन, हम तौ जाने अब तौ मरि जाब...। पप्पू के पापा के दबान देखे तो हम घबराइ गए। एनके कपारे से खून निकरत रहन...यह कहते-कहते सुशीला की आंखों से आंसू बह चले। उनका एक हाथ आंसू पाेछने लगा तो दूसरा अपने पति मुरारी लाल के सिर पर था। पति के सिर पर पट्टी बंधी थी। दैनिक जागरण ने राजा प्रताप बहादुर अस्पताल में बात शुरू की तो सुशीला बोल पड़ीं...हम सबे 20 साल से अमावस पै नहाय जाइत है। अबकी का जनी का भा, गाड़ी लड़ि गय। हमरे सिनवा और गोड़े पै चढ़ि के कइओ जने चला गएन, अब गोड़वा नाहीं उठता बा।
पति की फिक्र में अपनी चोट भुला बैठीं
Pratapgarh Accident बगल के बेड पर पड़े अदालती चंद्र को संभाल रहीं पत्नी कमला को भी चोट थी, लेकिन वह पति की फिक्र में अपने दर्द को भुला बैठी हैं। कहती हैं...कुहिरवा और सर्दिया बहुत रही। यही बरे डरेबर तिरपाल डारि दिहे रहेन। जब गड़िया उल्टी तौ हम रोवै लागे। गोहार लगाए कि हे गंगा माई बचावा सबका। माइन के किरपा रही कि थोरै चोट लागि। अब यहि साल तौ नहाय न पाउब, जिनगी रही तौ अगले बरस जाब।
दर्द से कराह रहे थे घायल पुजारी व अन्य
दर्द से कराहते हुए घायल पुजारी, सुनीता देवी, गोरख चंद्र ने बताया कि गंगा माई कै दर्शन-पूजन औ नहाय के बरे हब सबे चला रहेन। कम्मर ओढ़े रहे। एतने में सब एक दुसरे के उपर गिरै लागें, समझिन न पाए कि भवा का। थोरी देर मा एंमुलेंस हांय-हायं करत की आइ गय। राजू अपने पांच साल के पुत्र आर्यन को गोद में लेकर पुचकार रहा था। बेटे के सिर में पट्टी व आंखों में दहशत से हादसे की पीड़ा बयां हो रही थी।
बिखर गई जतन से बंधी गठरी
कवि कैलाश गौतम ने जिस अमौसा के मेले को अपनी पंक्तियों में जीवंत किया है, श्रद्धालुओं की तैयारी भी उसी प्रकार दिखी। यात्रा के लिए सबने जरूरी सामान की गठरी बांध रखी थी। लाई, चिवड़ा, चिक्की, गजक, ढूंढी, तिलवा सतुआ, पूड़ी, अचार झोले में पैक थे। डिब्बों में पानी भरा था। पिकअप पलटते ही झोले-बोरे के बंधन टूट गए। उसमें रखा खाद्य पदार्थ इधर-उधर बिखर गया। घायलों को अपना सामान समेटने की नहीं, बल्कि अपनी जान की परवाह थी।
‘डबल डेकर’ मालवाहक पर सफर
सरकार बार-बार कहती है कि मालवाहकों को सवारी ढाेने में प्रयोग न किया जाए। कई बार इससे हादसे होते हैं। पहले हुए भी हैं, लेकिन वाहन स्वामी व चालक कमाई के चक्कर में ऐसे निर्देशों को ठेंगा दिखा देते हैं। कभी ट्रक तो कभी ट्रैक्टरों पर मेलार्थी लादे जाते हैं। संत कबीर नगर के भी लोग मालवाहक को डबल डेकर बस की तरह बनाकर लदे थे। यही वजह रही कि बस की ठोकर लगी तो फिर पिकअप पलट गया। यह तो अच्छा रहा कि बस चालक भागने के चक्कर में किसी को कुचलता नहीं गया, नहीं तो कई लोग जिंदगी से हाथ धो बैठते।
अलर्ट मैसेज से बुलाए गए चिकित्सक
हादसा होने पर राजा प्रताप बहादुर अस्पताल को यह संदेश दिया गया कि 40 से अधिक श्रद्धालु घायल हो गए हैं। यह खबर सुनकर अस्पताल प्रशासन में खलबली मच गई। अलर्ट मैसेज भेजकर अपने कमरे पर आराम कर रहे चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ को आनन-फानन अस्पताल बुलाया गया।
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