प्रतीकात्मक चित्र
संवाद सहयोग, जागरण, संभल। शहर में इलाज के नाम पर चल रहे झोलाछापों का जाल लगातार फैलता जा रहा है। जबकि स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड के अनुसार शहर में कुल 45 अस्पताल, पांच लैब और तीन अल्ट्रासाउंड ही पंजीकृत हैं। इसके बावजूद गली-मुहल्लों से लेकर अन्य स्थानों तक अवैध क्लीनिक और नर्सिंग होम धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं।
यह झोलाछाप न तो प्रशिक्षित हैं और न ही उनके पास इलाज की वैधानिक अनुमति, फिर भी लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर वे जानलेवा उपचार कर रहे हैं। इतना ही नहीं इंटर पास तक महिलाओं के आपरेशन कर रहे हैं। इसका राजफाश सिटी मजिस्ट्रेट की छापेमारी में हो चुका है। हालांकि लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।
शहर में झोलाछापों का नेटवर्क इस कदर मजबूत हाे चुका है कि लोगों के लिए सही और गलत इलाज में फर्क करना भी मुश्किल हो गया है। सस्ती फीस, तुरंत इलाज और बड़े बड़े दावों के जरिए ये झोलाछाप मरीजों को अपने जाल में फंसा लेते हैं। कई मामलों में बिना किसी जांच के दवाएं दे दी जाती हैं, इंजेक्शन लगाए जाते हैं और गंभीर रोगों का भी इलाज कर दिया जाता है।
हाल ही में सिटी मजिस्ट्रेट सुधीर कुमार सोनी द्वारा की गई छापेमारी में चौंकाने वाला मामला सामने आया था। छापेमारी के दौरान कस्बा सिरसी के इंडियन अस्पताल में इंटर पास एक युवक ने महिलाओं के आपरेशन कर डाले। एक ही नहीं है बल्कि कई ऐसे झोलाछाप हैं जो बिना प्रशिक्षण और डिग्री के मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग विभागीय रिकार्ड में कुल 45 अस्पताल, पांच लैब और तीन अल्ट्रासाउंड ही पंजीकृत हैं। इसके अलावा संचालित हो रहे क्लीनिक और नर्सिंग होम अवैध हैं। बावजूद इसके इन पर प्रभावी कार्रवाई न होने से झोलाछापों के हौसले बुलंद हैं। शिकायतों के बाद भी कई बार कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह जाती है।
हालांकि, लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। इलाज कराने से पहले चिकित्सक की डिग्री, अस्पताल का पंजीकरण और सुविधाओं की जानकारी जरूर लें। थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। झोलाछापों के खिलाफ जागरूकता ही इस खतरे से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है।
स्वास्थ्य विभाग की सूची के हिसाब से संभल तहसील क्षेत्र में 45 अस्पताल पंजीकृत हैं। पांच और तीन अल्ट्रासाउंड भी संचलित हैं। जो, विभाग के रिकार्ड में हैं। बाकी जो, अवैध मिलते जा रहे हैं। उनके खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग कुछ अस्पतालों का पंजीकरण प्रक्रिया में होने की बात भी कह रहा है।
- सुधीर कुमार सोनी, सिटी मजिस्ट्रेट, संभल।
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