सीएम सुक्खू ने दिल्ली में पीएम ई बसों के लिए पहाड़ी राज्यों को विशेष छूट देने की मांग उठाई। प्रतीकात्मक फोटो
राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत पहाड़ी राज्यों को किसी प्रकार की छूट नहीं दी गई है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के परिणामस्वरूप ई-बसों के संचालन में अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
योजना के वर्तमान प्रविधान के कारण हिमाचल प्रदेश इसका कोई लाभ नहीं उठा पा रहा है, जबकि हिमाचल सरकार ने ग्रीन मोबिलिटी के तहत अनेक कदम उठाए हैं।
ऐसे में पीएम ई-बस सेवा योजना में पहाड़ी राज्यों को विशेष छूट दी जानी चाहिए। यह मांग उन्होंने शुक्रवार को नई दिल्ली में केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल से मुलाकात के दौरान की।
शिमला ही किया गया है शामिल
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि पीएम ई-बस सेवा योजना के तहत हिमाचल के केवल एक शहर शिमला को ही शामिल किया गया है। यह योजना 10 लाख जनसंख्या वाले शहरों में ही लागू होती है।
इन शहरों के लिए भी मिले सुविधा
धर्मशाला, मंडी, सोलन, पालमपुर, हमीरपुर, ऊना और बद्दी जैसे शहरी स्थानीय निकाय तेजी से आर्थिक और मानव संसाधन विकास के केंद्र बन रहे हैं। इस बात को ध्यान में रखते हुए हिमाचल को योजना के लाभ लेने के लिए मौजूदा मानदंडों में ढील दी जानी चाहिए।
संचालन सहायता बढ़ाने का भी आग्रह
सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार चरणबद्ध तरीके से डीजल बसों को इलेक्ट्रिक बसों से बदल रही है। सरकार ने 1500 डीजल बसों को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक बसों से बदलने का निर्णय लिया है। इसके तहत सरकार अपने संसाधनों से 297 ई-बसें खरीद रही है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री से प्रदेश में परिचालन व्यय मॉडल (आपरेशनल एक्सपेंडिचर मॉडल) के तहत माइलेज को कम कर 150 किलोमीटर तक सीमित करने का आग्रह किया। उन्होंने वर्तमान संचालन सहायता को 22 रुपये प्रति किलोमीटर से 52 रुपये प्रति किलोमीटर करने का भी आग्रह किया, ताकि एचआरटीसी बिना हानि के ई-बसों का संचालन सुनिश्चित कर सके।
बीबीएमबी से 47 बीघा जमीन की एनओसी दिलाई जाए
मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड (एचपीपीसीएल) के एकीकृत कार्यालय के लिए सुंदरनगर में उपलब्ध 47 बीघा भूमि के हस्तांतरण एवं आवंटन के लिए भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करने में सहयोग प्रदान करने का अनुरोध किया। वर्तमान में इसके कार्यालय राज्य के विभिन्न स्थानों में स्थित हैं।
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