नई दिल्ली। अगले वित्त वर्ष 2027 के आम बजट की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है और बाजार की निगाहें एक बार फिर पावर और एनर्जी सेक्टर पर टिकी हैं। निवेशकों को उम्मीद है कि सरकार पीएम सूर्य घर रूफटॉप सोलर, ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर, डिस्कॉम्स के लिए आरडीएसएस, स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) आधारित न्यूक्लियर मिशन और पंप्ड स्टोरेज जैसी योजनाओं को आगे बढ़ाएगी।
हालांकि, यह भी माना जा रहा है कि नए बजटीय आवंटन सीमित रह सकते हैं और निकट भविष्य में इससे बाजार में किसी बड़े उछाल की संभावना कम है। इसके बावजूद बजट से रिन्यूएबल एनर्जी, ग्रिड विस्तार और एनर्जी स्टोरेज जैसे क्षेत्रों की दीर्घकालिक दिशा तय होने की उम्मीद जताई जा रही है।
बजट से क्या हैं प्रमुख उम्मीदें?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि सरकार का जोर रिन्यूएबल एनर्जी पर बना रह सकता है, जिसमें सोलर और रूफटॉप इंस्टॉलेशन को प्राथमिकता मिलेगी। साथ ही निजी क्षेत्र की भागीदारी और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर्स के जरिए न्यूक्लियर पावर की भूमिका को और मजबूत किया जा सकता है।
इसके अलावा बैटरी एनर्जी स्टोरेज और पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज को रणनीतिक प्राथमिकता मिलने की संभावना है, ताकि बढ़ती बिजली मांग और ग्रिड स्थिरता की जरूरतों को पूरा किया जा सके।
चुनौतियां भी कम नहीं
जहां उम्मीदें मजबूत हैं, वहीं कुछ बड़ी चुनौतियां भी सामने हैं। न्यूक्लियर और स्टोरेज प्रोजेक्ट्स में ऊंची लागत और रिटर्न आने में लंबा समय लगना एक बड़ी चिंता है। इसके अलावा रिन्यूएबल एनर्जी से समृद्ध राज्यों में ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर की दिक्कतें और डिस्कॉम्स की कमजोर वित्तीय स्थिति भी सेक्टर के लिए चुनौती बनी हुई है।
इंडस्ट्री की क्या हैं मांगें?
एनर्जी सेक्टर से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि परियोजनाओं को व्यावहारिक बनाने के लिए टैक्स और नीतिगत सहयोग जरूरी है। इसमें ग्रुप टैक्स कंसोलिडेशन, रिन्यूएबल कंपोनेंट्स पर कम जीएसटी, न्यूक्लियर स्टार्टअप्स के लिए डायरेक्ट टैक्स इंसेंटिव और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम्स के लिए डेप्रिसिएशन व आरएंडडी क्रेडिट्स जैसी मांगें शामिल हैं।
वहीं, बाजार विश्लेषकों को उम्मीद है कि सरकार पावर सेक्टर की स्थिरता बनाए रखने पर ध्यान देगी, जिसमें ट्रांसमिशन नेटवर्क, ग्रिड मॉडर्नाइजेशन, एनर्जी स्टोरेज और रूफटॉप सोलर पर विशेष जोर रहेगा।
बड़े बजट की उम्मीद कम
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार भी बहुत बड़े बजटीय इजाफे की संभावना कम है। पिछले साल रूफटॉप सोलर योजनाओं में बड़ा फंड बढ़ाने के बजाय इंस्टॉलेशन पर फोकस किया गया था। इस बार इनमें सीमित बढ़ोतरी हो सकती है। कुल मिलाकर पावर सेक्टर के लिए ₹45,000 से ₹60,000 करोड़ के बीच आवंटन की उम्मीद जताई जा रही है, जिसमें बैटरी स्टोरेज, हाइड्रो, एसएमआर और ग्रीन एनर्जी प्रमुख रह सकते हैं।
किन कंपनियों को मिल सकता है फायदा?
बाजार जानकारों के अनुसार इस बजट से प्योर-प्ले रिन्यूएबल और न्यूक्लियर कंपनियों को अपेक्षाकृत अधिक लाभ मिल सकता है। इसके अलावा HVDC ट्रांसमिशन से जुड़ी कंपनियों को मजबूत ऑर्डर फ्लो और बेहतर एसेट यूटिलाइजेशन देखने को मिल सकता है। पावर सेक्टर को फंडिंग देने वाली संस्थाओं को भी बढ़ी हुई निवेश जरूरतों से फायदा होने की संभावना है।
शेयर बाजार पर क्य असर?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि बजट के तुरंत बाद बाजार में बड़ी हलचल की उम्मीद कम है, क्योंकि न्यूक्लियर और हाइड्रो जैसे प्रोजेक्ट्स को पूरा होने में 5 से 7 साल तक का समय लगता है। ऐसे में बजट घोषणाएं तात्कालिक लाभ के बजाय लॉन्ग टर्म विजन देती हैं।
हालांकि, देश में बिजली की मांग मजबूत बनी हुई है, जिसके चलते कुछ पावर कंपनियों में ऊंचे वैल्यूएशन के बावजूद शॉर्ट टर्म में सकारात्मक रुझान देखने को मिल सकता है। साथ ही एनटीपीसी, पीएफसी और आरईसी जैसे शेयरों पर भी निवेशकों की नजर बनी रह सकती है। |