कांग्रेस और सपा का आरोप, जानबूझकर काटा गया पात्रों का नाम। प्रतीकात्मक तस्वीर
जागरण संवाददाता, (जौनपुर)। एसआईआर के बाद बदली मतदाता सूची ने सभी राजनीतिक दलों को नए सिरे से रणनीति बनाने पर मजबूर कर दिया है। यहां 2022 की तुलना में जनपद में लगभग 5.89 लाख मतदाता कम हो गए हैं। यह कटे हुए वोट किस सामाजिक और राजनीतिक वर्ग से जुड़े थे, इसे लेकर सियासी आकलन शुरू हो चुका है।
2022 में पांच पर सपा और चार सीटों पर भाजपा व सहयोगी दलों ने जीत दर्ज की थी। जिले के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में औसतन 40 से 50 हजार मतदाताओं के नाम सूची से हटे हैं, जबकि पिछले चुनाव में कई सीटों पर जीत का अंतर बेहद कम था। जौनपुर सदर सीट पर भाजपा के गिरीश चंद्र यादव ने सपा के अरशद खान को 8,052 वोटों से हराया था, जबकि यहां एक लाख चार हजार से अधिक मतदाता कम हो गए हैं। मल्हनी में सपा की जीत का अंतर 17,527 वोट था, लेकिन यहां 59,341 मतदाता घट गए हैं। मुंगराबादशाहपुर, मछलीशहर, मड़ियाहूं, बदलापुर और शाहगंज में जीत का अंतर कुछ हजार या सैकड़ों में था, जबकि मतदाताओं की कटौती 50 से 65 हजार के बीच है।
फर्जी मतदाताओं पर लगेगी रोक : अजीत प्रजापति
भाजपा जिलाध्यक्ष जौनपुर अजीत प्रजापति ने एसआईआर अभियान की सराहना करते हुए कहा कि से मतदाता सूची से फर्जी लोगों को बाहर करने में मदद मिलेगी। इसका सीधा लाभ भाजपा को मिलेगा। कारण भाजपा छोड़ अन्य पार्टियों ने फर्जी मतदाताओं के नाम लिस्ट में बढ़वा रखे थे। अब हम सभी सीट जीतने के कंडीशन में हैं।
लोगों को किया जा रहा परेशान : राकेश मौर्या
सपा जिलाध्यक्ष एसआईआर के नाम पर आम जनमानस को परेशान किए जाने का आरोप लगाया। कहा कि मनमानी तरीके से पात्र लोगों को भी सूची से बाहर कर दिया जाना निर्वाचन आयोग की मंशा पर सवालिया निशान है। हर भारतीय को वोट देने का संवैधानिक अधिकार है। इससे वंचित किया जाता है तो यह निंदनीय है।
पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए मतदाताओं को : संग्राम भारती
बसपा जिलाध्यक्ष संग्राम भारती ने भी एसआईआर प्रक्रिया के तरीके पर नाखुशी जताई। कहा कि जिन पात्रों के नाम मतदाता सूची में नहीं हैं इसे लेकर हमारे कार्यकर्ता गंभीर हैं। हमारी मांग है कि सूची से बाहर लोगों को अपना नाम शामिल कराने के लिए पर्याप्त अवसर दिया जाना चाहिए।
जानबूझकर काटे गए हैं मुस्लिमों और बैकवर्डों के नाम : प्रमोद सिंह
कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रमोज सिंह ने कहा कि जो वोट कटे हैं उनमें ज्यादातर बैकवर्ड, अदर बैकवर्ड और खासकर मुस्लिमों व अनुसूचित जातियों के मतदाता हैं। उसका पुनरीक्षण होना चाहिए। बीएलओ ठीक से काम नहीं किए हैं, सब जल्दबाजी में हुआ है। इसकी समय सीमा नए सिरे से बढ़ाई जानी चाहिए।
यह भी पढ़ें- SIR in UP: मऊ में 23 हजार मतदाताओं को भेजी जा रही नोटिस, जानकारी के बाद होगा वेरिफिकेशन
यह भी पढ़ें- UP SIR में वोटरों को आखिरी मौका, बूथ पर मतदाता सूची में चेक करें अपना नाम, ये है प्रोसेस |