DMK MP court complaint Bihar: बिहार के मुजफ्फरपुर में उनके खिलाफ परिवाद दायर किया गया है। फाइल फोटो
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। Dayanidhi Maran controversy: उत्तर भारत की महिलाओं को लेकर की गई विवादास्पद टिप्पणी द्रमुक (DMK) सांसद दयानिधि मारन को महंगी पड़ गई है। बिहार के मुजफ्फरपुर में उनके खिलाफ एसीजेएम पश्चिमी की अदालत में परिवाद दायर किया गया है। यह परिवाद अधिवक्ता सुधीर कुमार ओझा द्वारा कराया गया है, जिसमें सांसद पर उत्तर भारतीय महिलाओं के लिए अभद्र और अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया है।
परिवाद में कहा गया है कि दयानिधि मारन के बयान से उत्तर भारत की महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंची है और यह बयान सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाला है। अदालत ने परिवाद स्वीकार कर मामले को सुनवाई के लिए दर्ज कर लिया है।
दरअसल, द्रमुक सांसद दयानिधि मारन ने कुछ दिन पहले चेन्नई स्थित ‘कैद-ए-मिल्लत गवर्नमेंट कॉलेज फॉर विमेन’ में आयोजित एक लैपटॉप वितरण समारोह के दौरान उत्तर भारत और तमिलनाडु की महिलाओं की तुलना करते हुए विवादित बयान दिया था।
क्या कहा था दयानिधि मारन ने?
कार्यक्रम में छात्राओं को संबोधित करते हुए दयानिधि मारन ने कहा था कि उत्तर भारत के राज्यों में लड़कियों को घर में रहने, रसोई तक सीमित रहने और बच्चे पैदा करने तक सीमित कर दिया जाता है। इसके विपरीत उन्होंने तमिलनाडु की प्रशंसा करते हुए कहा कि यहां की लड़कियां लैपटॉप लेकर आत्मविश्वास के साथ पढ़ाई करती हैं और करियर बनाती हैं। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन को देश का सर्वश्रेष्ठ मुख्यमंत्री बताया और तमिलनाडु के ‘द्रविड़ मॉडल’ को आदर्श करार दिया।
क्यों भड़का विवाद?
दयानिधि मारन के इस बयान के बाद उत्तर बनाम दक्षिण की बहस एक बार फिर तेज हो गई। विपक्षी दलों, विशेषकर भाजपा ने इस बयान को उत्तर भारतीय महिलाओं का अपमान और क्षेत्रीय विभाजन की राजनीति करार दिया।
सोशल मीडिया पर लोगों ने इंदिरा गांधी, कल्पना चावला, मनु भाकर, रोशनी नादर सहित उत्तर भारत की कई सफल महिलाओं के उदाहरण गिनाकर दयानिधि मारन को जवाब दिया। भाजपा नेताओं ने कहा कि यह बयान न केवल आपत्तिजनक है, बल्कि महिलाओं की उपलब्धियों का खुला अपमान है।
उत्तर प्रदेश और बिहार के कई नेताओं ने भी इस टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। वहीं, द्रमुक के सहयोगी दलों के लिए भी इस बयान का बचाव करना मुश्किल हो गया है। |