दाउदनगर के पहले पार्क के उद्घाटन के बाद विवाद खड़ा (फोटो-सोशल मीडिया)
संवाद सहयोगी, दाउदनगर (औरंगाबाद)। 141 साल पुराने दाउदनगर शहर को पहला पार्क मिलने की खुशी ज्यादा देर टिक नहीं सकी। पार्क के उद्घाटन के साथ ही नगर परिषद और मुख्य पार्षद पर वित्तीय अनियमितता, अतिक्रमण और जमीन घोटाले जैसे गंभीर आरोप लगने लगे हैं। आरोपों का यह सिलसिला इंटरनेट मीडिया से निकलकर अब सियासी बहस का रूप ले चुका है।
वार्ड पार्षद ने उठाए गंभीर सवाल
वार्ड पार्षद वसंत कुमार ने सोशल मीडिया पर पोस्ट के जरिए पार्क निर्माण में लगभग 50 लाख रुपये खर्च होने पर सवाल उठाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह खर्च नियमों के अनुरूप नहीं है। साथ ही कहा कि अतिक्रमण हटाने में भेदभाव किया गया है। गरीबों के कथित अतिक्रमण तो हटाए गए, लेकिन प्रभावशाली लोगों पर कार्रवाई नहीं हुई।
मुख्य पार्षद के घर पर भी अतिक्रमण का दावा
वसंत कुमार ने आरोप लगाया कि मुख्य पार्षद अंजली कुमारी के आवास का लगभग 20 फीट हिस्सा अतिक्रमित भूमि पर बना हुआ है। उनका कहना है कि यदि पार्क निर्माण के लिए अतिक्रमण हटाया गया, तो मुख्य पार्षद को भी पहले अपने घर की मापी कराकर कब्जाई गई जमीन पार्क को देनी चाहिए थी। उन्होंने यह भी कहा कि अतिक्रमण से जुड़ा मामला उच्च न्यायालय में लंबित है, ऐसे में वाद निष्पादन से पहले पार्क का उद्घाटन नहीं होना चाहिए था।
जमीन बंदरबाट के आरोप और जांच की मांग
वार्ड पार्षद केदारनाथ सिंह द्वारा पूर्व में नप की जमीन बेचे जाने के बयान पर भी वसंत कुमार ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ऐसे कई उदाहरण मौजूद हैं और अनेक मामले न्यायालय में लंबित हैं। उन्होंने दोषियों के नाम सार्वजनिक करने और उच्चस्तरीय जांच की मांग की।
मुख्य पार्षद का पलटवार, बुलडोजर चलाने की चुनौती
आरोपों पर मुख्य पार्षद अंजली कुमारी ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि पार्क का निर्माण पूरी तरह खाली पड़ी सरकारी जमीन पर किया गया है और किसी का घर नहीं तोड़ा गया। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि यदि जांच में उनके घर का कोई हिस्सा अतिक्रमित पाया गया तो वे स्वयं बुलडोजर चलवाकर उसे तुड़वा देंगी।
आमंत्रण को लेकर भी विवाद
पार्क जिस वार्ड 11 में बना है, उसके पार्षद संजय प्रसाद ने दावा किया कि उन्हें औपचारिक या अनौपचारिक रूप से उद्घाटन समारोह में नहीं बुलाया गया, जबकि उनका नाम स्वागतकर्ता सूची में था। कई अन्य वार्ड पार्षदों ने भी इसी तरह की शिकायत की है। हालांकि, मुख्य पार्षद ने कहा कि सभी को सोशल मीडिया के माध्यम से आमंत्रित किया गया था और किसी का अपमान करने का इरादा नहीं था।
कुल मिलाकर, दाउदनगर का पहला पार्क विकास का प्रतीक बनने से पहले ही आरोप-प्रत्यारोप और सियासी खींचतान का केंद्र बन गया है। |
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