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Bihar Land Records: 45 दिनों की उलटी गिनती शुरू, इन 7 तरह की जमीन पर जमाबंदी रही तो जा सकती है संपत्ति

LHC0088 2026-1-16 10:26:48 views 1249
  

राज्य भर में चलेगा जमाबंदी रद्दीकरण अभियान



डिजिटल डेस्क, पटना। बिहार में जमीन से जुड़े मामलों को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। अगर आपके नाम पर सरकारी भूमि की जमाबंदी गलत तरीके से दर्ज है, तो अब सावधान हो जाइए। बिहार सरकार ने ऐसी सभी जमाबंदियों को रद्द करने का निर्देश जारी कर दिया है और इसके लिए 45 दिनों की समय-सीमा तय की गई है।
राज्य भर में चलेगा जमाबंदी रद्दीकरण अभियान

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सरकारी जमीन पर कायम फर्जी और अवैध जमाबंदियों के खिलाफ विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया है। प्रधान सचिव सी.के. अनिल ने सभी प्रमंडलीय आयुक्तों, जिलाधिकारियों और अपर समाहर्ताओं को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं।
इन सात प्रकार की सरकारी जमीन पर होगी कार्रवाई

सरकार की नजर उन सात श्रेणियों की जमीन पर है, जो सरकारी होने के बावजूद निजी व्यक्तियों के नाम पर दर्ज हो गई हैं। इनमें गैर मजरुआ आम, कैसरे-हिंद और खास महाल की जमीन प्रमुख हैं। खास महाल की वह जमीन, जिसकी विधिसम्मत बंदोबस्ती कभी नहीं हुई, उसकी जमाबंदी सीधे रद्द की जाएगी।
स्थानीय निकाय और सरकारी संस्थाओं की भूमि भी शामिल

यदि कोई जमीन पहले जिला परिषद, नगर पंचायत, नगर परिषद, नगर निगम या ग्राम पंचायत की बताई गई है और उस पर निजी जमाबंदी कायम है, तो वह भी जांच के दायरे में आएगी। इसके अलावा राज्य सरकार के किसी विभाग, बोर्ड, निगम या बियाड़ा की भूमि भी इस कार्रवाई में शामिल है।
केंद्र सरकार और धार्मिक संस्थानों की जमीन पर भी नजर

यदि भूमि भारत सरकार के किसी मंत्रालय की है, धार्मिक न्यास बोर्ड से जुड़ी है, किसी सरकारी या अर्द्ध-सरकारी मान्यता प्राप्त ट्रस्ट या गौशाला की है, और उस पर जमाबंदी गलत तरीके से कायम है, तो अपर समाहर्ता उसे रद्द कर सकते हैं।
45 दिनों में पूरी करनी होगी कार्रवाई

सरकार ने इस पूरे अभियान के लिए 45 दिनों की समय-सीमा तय की है। अपर समाहर्ताओं को निर्देश दिया गया है कि वे तय अवधि के भीतर सभी चिन्हित मामलों में जमाबंदी रद्द करने की कार्रवाई सुनिश्चित करें।
अंचलाधिकारी पर बढ़ी जिम्मेदारी

प्रधान सचिव ने अंचल अधिकारियों को याद दिलाया है कि 3 जून 1974 से वे अपने-अपने अंचल की सरकारी भूमि के कलेक्टर हैं। यदि उनके कार्यकाल में सरकारी जमीन का अवैध हस्तांतरण या निजी नाम पर जमाबंदी और दाखिल-खारिज पाया गया, तो उनके खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
पुराने अभिलेख खंगालने का आदेश

अंचल अधिकारियों को अभियान चलाकर पुराने राजस्व अभिलेखों की जांच करने को कहा गया है। ऐसे सभी मामलों की सूची तैयार कर 31 जनवरी 2026 तक अपने-अपने अपर समाहर्ता को प्रतिवेदन सौंपना अनिवार्य होगा।
सरकारी भूमि के संरक्षक हैं जिलाधिकारी

राजस्व विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिले में सरकारी भूमि के संरक्षक समाहर्ता (डीएम) होते हैं। उन्हें इस पूरे अभियान की निगरानी करनी होगी, ताकि सर्वे में दर्ज सरकारी जमीन की वापसी सुनिश्चित की जा सके।
लैंड बैंक सृजन पर सरकार का फोकस

सरकारी जमीन की वापसी के बाद जिला और अंचल स्तर पर लैंड बैंक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे भविष्य में सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों के लिए भूमि उपलब्ध कराना आसान होगा।
जमीन मामलों में बड़ा संदेश

सरकार के इस फैसले से साफ संदेश है कि अब सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा और फर्जी जमाबंदी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 45 दिनों की इस कार्रवाई के बाद राज्य में भूमि विवाद और अवैध कब्जे पर बड़ी चोट मानी जा रही है।
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