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झारखंड में ईडी टकराव, पुलिस एफआईआर व छापे से बवाल।
डिजिटल डेस्क, रांची। झारखंड में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और राज्य पुलिस के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। रांची पुलिस ने ईडी के क्षेत्रीय कार्यालय पर छापेमारी की और दो अधिकारियों के खिलाफ मारपीट का एफआईआर दर्ज किया।
ईडी ने इसे जांच में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप बताते हुए झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें एफआईआर रद्द करने और सीबीआई जांच की मांग की गई है।
मामला 16 जनवरी को हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। यह घटना भ्रष्टाचार जांचों के बीच केंद्र-राज्य टकराव को उजागर करती है, जहां भाजपा नेता पश्चिम बंगाल जैसी स्थिति की आशंका जता रहे हैं।
घटना का विवरण
15 जनवरी को सुबह रांची पुलिस की टीम ईडी के एयरपोर्ट रोड कार्यालय पहुंची। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज जब्त की और दस्तावेजों की जांच की।
यह कार्रवाई पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के पूर्व कर्मचारी संतोष कुमार की शिकायत पर हुई, जिन पर 2.71 करोड़ रुपये की हेराफेरी का आरोप है और ईडी जांच कर रही है।
कुमार ने 12 जनवरी को एयरपोर्ट थाने में एफआईआर दर्ज कराई, जिसमें ईडी के असिस्टेंट डायरेक्टर प्रतीक और असिस्टेंट शुभम पर पूछताछ के दौरान मारपीट, गाली-गलौज और धमकी का आरोप है। ईडी का दावा है कि कुमार ने खुद को चोट पहुंचाई, ताकि अधिकारियों को फंसाया जा सके। ईडी ने कोई चोट नहीं पहुंचाई है।
ईडी की प्रतिक्रिया
ईडी ने पुलिस कार्रवाई को “प्रत्यक्ष हस्तक्षेप“ बताते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में एफआईआर रद्द करने और मामले की सीबीआई जांच की मांग की गई है।
ईडी का कहना है कि राज्य पुलिस जांच में बाधा डाल रही है, जो जल आपूर्ति व अन्य मामलों को प्रभावित कर सकती है।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज
पूरे विवाद में भाजपा-झामुमो आमने-सामने दिखाई दे रही है। आरोप प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। हाई कोर्ट पर निगाहें टिकी है।
बाबूलाल मरांडी (नेता प्रतिपक्ष, भाजपा) ने कहा
बाबूलाल मरांडी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि ईडी कार्यालय में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जुड़े महत्वपूर्ण सबूत हैं। पुलिस कार्रवाई के बहाने सबूतों से छेड़छाड़ या नष्ट करने की आशंका है।
उन्होंने लिखा, “झारखंड को बंगाल नहीं बनने देंगे। भ्रष्टाचार की सजा जरूर मिलेगी।“ मरांडी ने पीएमओ और गृह मंत्रालय से केंद्रीय बलों की तैनाती की मांग की।
निशिकांत दुबे (गोड्डा सांसद, भाजपा) के बोल
निशिकांत दुबे ने एक्स पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल की तर्ज पर झारखंड सरकार ने ईडी कार्यालय को घेर लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईडी कार्यालय में मुख्यमंत्री और पुलिस से जुड़े हजारों करोड़ के भ्रष्टाचार मामलों के महत्वपूर्ण साक्ष्य हैं।
आरोप लगाते हुए कहा, आशंका है कि पुलिस कार्रवाई की आड़ में साक्ष्यों से छेड़छाड़ की जा सकती है या ईमानदार अधिकारियों को गिरफ्तार किया जा सकता है।
दुबे ने लिखा, “हेमंत जी, कान खोलकर सुन लीजिए... झारखंड को बंगाल नहीं बनने देंगे। आपको भ्रष्टाचार की सजा जरूर मिलेगी।“ उन्होंने पीएमओ और गृह मंत्रालय से ईडी कार्यालय पर केंद्रीय बलों की तैनाती की मांग की।
सुप्रियो भट्टाचार्य (झामुमो महासचिव व प्रवक्ता) का जवाब
झामुमो प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने पुलिस कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि पुलिस ने नियमों के अनुसार काम किया। उन्होंने कहा, शिकायत पर जांच करना पुलिस का कर्तव्य है। ईडी अधिकारियों को थाने बुलाया गया था, लेकिन वे नहीं आए।
भट्टाचार्य ने बाबूलाल मरांडी और अन्य भाजपा नेताओं पर आरोप लगाया कि वे केंद्रीय और राज्य बलों के बीच टकराव भड़का रहे हैं और उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज होना चाहिए।
झारखंड और बंगाल में एक सी स्थिति
वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश अश्क बताते हैं, यह विवाद ईडी की चल रही जांचों (आधा दर्जन घोटाले) के बीच आया है, जहां सत्ता पक्ष के कई नेता शामिल हैं।
कुछ मामले पूर्वतर्ती सरकारों के टाइम के भी हैं। भाजपा इसे भ्रष्टाचार की रक्षा बताती है, जबकि झामुमो ईडी पर राजनीतिक दुरुपयोग का आरोप लगाती है।
घटना पश्चिम बंगाल के ईडी विवाद से मिलती-जुलती है, जहां सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस एफआईआर पर रोक लगाई थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ईडी कार्यालयों की सुरक्षा बढ़ाई है। |
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