मुंबई। सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) के चेयरमैन तुहिन कांता ने कहा है कि कैपिटल मार्केट रेगुलेटर, इस बात पर विचार कर रहा है कि क्या उसे देश के अनलिस्टेड शेयर मार्केट (Unlisted Share Market) को रेगुलेट करना चाहिए, जो अभी बड़े पैमाने पर उसके डायरेक्ट कंट्रोल से बाहर काम करता है। एसोसिएशन ऑफ इन्वेस्टमेंट बैंकर्स ऑफ इंडिया के 2025-26 के सालाना कन्वेंशन के मौके पर तुहिन कांता पांडे ने कहा कि इस मुद्दे पर कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के साथ चर्चा की जा रही है।
उन्होंने समझाया, “सेबी को पहले यह जांचना होगा कि क्या उसके पास उन कंपनियों को रेगुलेट करने का कानूनी अधिकार है जो स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड नहीं हैं और ऐसा रेगुलेशन कितनी दूर तक बढ़ाया जा सकता है।“
क्या होते हैं अनलिस्टेड शेयर?
अनलिस्टेड शेयर में मार्केट में उन कंपनियों के शेयर शामिल होते हैं जो स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेड नहीं होते हैं। निवेशक आमतौर पर ये शेयर प्राइवेट डील, एम्प्लॉई स्टॉक ऑप्शन प्लान या बिचौलियों के ज़रिए खरीदते हैं। क्योंकि ये कंपनियाँ लिस्टेड नहीं होती हैं, इसलिए उन्हें सख्त और लगातार जानकारी देने के नियमों का पालन करने की ज़रूरत नहीं होती है, जिससे अक्सर निवेशकों को कंपनी की फाइनेंशियल हेल्थ और बिज़नेस रिस्क के बारे में सीमित या देरी से जानकारी मिलती है।
अनलिस्टेड शेयर मार्केट पर निगरानी क्यों जरूरी?
सेबी प्रमुख तुहिन कांता पांडे ने कहा कि सेबी की मुख्य चिंताओं में से एक अनलिस्टेड मार्केट में कीमतों और कंपनियों के इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) लाने पर सामने आने वाले वैल्यूएशन के बीच बड़ा अंतर है। उन्होंने कहा, “प्राइवेट डील में तय की गई कीमतें अक्सर IPO बुक-बिल्डिंग प्रोसेस के दौरान तय की गई कीमतों से मेल नहीं खातीं, जिससे निवेशकों के लिए कन्फ्यूजन और संभावित जोखिम पैदा होते हैं।“
उन्होंने यह भी साफ किया कि लिस्टेड कंपनियों द्वारा फॉलो किए जाने वाले नियम सीधे तौर पर अनलिस्टेड फर्मों पर लागू नहीं किए जा सकते। परंपरागत रूप से, SEBI की रेगुलेटरी भूमिका तभी शुरू होती है जब कोई कंपनी अपने शेयर लिस्ट करने की तैयारी करती है।
ये भी पढ़ें- डेढ़ साल से टूटे जा रहे टाटा समूह की 4 कंपनियों के शेयर, 70% तक गिरे, एक स्टॉक का भाव 1500 से 400 रुपये पर आया
खत्म हो जाएगा GMP?
ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) एक अनौपचारिक बाज़ार है जहां अनलिस्टेड शेयरों और आगामी IPO शेयरों का कारोबार होता है। यह बाज़ार स्टॉक एक्सचेंज या सेबी (SEBI) द्वारा नियंत्रित नहीं होता है। ऐसे में यहां किसी शेयर की प्राइस डिस्कवरी का अभाव रहता है। अगर सेबी अनलिस्टेड शेयरों के कारोबार को औपचारिक रूप से विनियमित करना शुरू कर देता है, तो शेयरों की प्राइस डिस्कवरी आसान हो जाएगी, ऐसे में जीएमपी (GMP) अपनी वर्तमान अनौपचारिक स्थिति में खत्म हो जाएगा। |