जागरण संवाददाता, हाटा। सगे के हाथ कत्ल की गईं रूना व प्रियंका को मरने के बाद अपनों के हाथ आग भी नसीब नहीं हुआ। श्मशान घाट पर उनकी चिता को आग देने वाला कोई नहीं था। करीब एक घंटे से अधिक का वक्त बीत गया और कोई आगे नहीं आया। यह देख श्मशान कर्मचारी ने चिता को आग दे इंसानियत का धर्म निभाया।
परसा की 70 वर्ष की रूना व 28 वर्ष की प्रियंका का शव पोस्टमार्टम के बाद एंबुलेंस से मंगलवार दोपहर तीन बजे हेतिमपुर घाट ले जाया गया। वहां छह, सात की संख्या में सगे सबंधी मौजूद थे। सास-बहू के लिए एक ही चिता तैयार की गई। औपचारिकता पूरी होने के बाद शवों को जब आग देने की बारी आई तो कोई तैयार नहीं हुआ।
सगे-संबंधियों ने भी अपने कदम पीछे खींच लिए। करीब सवा घंटा तक यही स्थिति बनी रही। यह देख चिता तैयार करने वाले श्मशान कर्मचारियों में एक सुरेश आगे आए। उन्होंने चिता को आग दी। बता दें कि नशे का विरोध करने से नाराज सिकंदर गुप्ता ने बीते सोमवार को वृद्ध मां व पत्नी की ईंट से सिर कूचकर हत्या कर दी थी।
हत्या के बाद सिर से निकले मांस के लोथड़ों को वह आसपास फेंकता रहा। लोग पहुंचे तो दरवाजे पर बैठे सिकंदर को मांस खाते देख अवाक रह गए। लोगों की सूचना पर आई पुलिस ने उसे पकड़ा।
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हेतिमपुर घाट पर नपा की ओर से रखे गए हैं कर्मचारी
हेतिमपुर घाट पर नगर पालिका हाटा की ओर से कर्मचारी रखे गए हैं। जिससे कि अपनों द्वारा ठुकराए व लावारिश शवों का अंतिम संस्कार किया जा सके। रूना व प्रियंका के शवों के अंतिम संस्कार की व्यवस्था भी नगर पालिका की ओर से ही की गई थी।
बेटियां भी नहीं आईं घर, ठप पड़ा कर्मकांड
सिकंदर चार बहनों का इकलौता भाई है। उसके हाथों मां व भाभी की बर्बर तरीके से हत्या किए जाने की जानकारी पर हत्याकांड वाले दिन सभी बहनें घर आईं। शाम होने से पहले अपने अपने घरों को लौट गईं। घर पर ताला बंद है। रूना व प्रियंका की मृत्यु के बाद घर पर किसी के न होने से कर्मकांड भी नहीं हो रहा। लोग कह रहे कि परिवार में वृद्ध मां, इकलौते बेटे व बहू ही थे। सास, बहू की बेटे ने हत्या कर दी।
वह पुलिस की गिरफ्त में है। अब कर्मकांड कौन करे। उधर दिल दहला देने वाली इस घटना के बाद गांव के लोग सिकंदर के घर की तरफ कम ही आ जा रहे। घटना के तीसरे दिन भी सिकंदर के घर व आसपास सन्नाटा पसरा रहा। |
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