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US से लौट 50 की उम्र में शुरू किया धंधा, देश के सबसे बुजुर्ग अरबपतियों में एक; अब बेटियों के हाथ में साम्राज्य
नई दिल्ली। वो दशक था 1980 का। भारत में हरित क्रांति का दौर था। इंडिया विकास की नई परिभाषा लिख रहा था। लेकिन देश में बड़े और अच्छे अस्पतालों की कमी थी। स्वास्थ्य सेवाओं में कमी होने के चलते लोगों को सही इलाज नहीं मिल पा रहा था।
उस समय बहुत से लोग इलाज के अभाव के चलते दम तोड़ रहे थे। उस दौर में हृदय रोग के उपचार के लिए भारत में आज जितनी बेहतर सुविधाएं नहीं उपलब्ध थी। हम आपको ये सब क्यों बता रहे हैं, क्योंकि हम आपको जो कहानी बताने जा रहे हैंवह इसी से जुड़ी है। आइए जानते हैं आखिर वह कहानी क्या है।
1979 में गई मरीज की जान तो पड़ी सबसे बड़े हॉस्पिटल चेन की नींव
आपने अपोलो हॉस्पिटल्स (Apollo Hospitals) का नाम जरूर सुना होगा। इस हॉस्पिटल्स चेन की नींव आज से 46 साल पहले ही पड़ चुकी थी, जब हृदय रोग से पीड़ित एक मरीज को सही इलाज नहीं मिल पाया और उसकी मौत हो गयी।
साल था 1979 का भारत के जाने-माने कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर प्रताप चंद्र रेड्डी (Prathap Chandra Reddy) जो अमेरिका में थे। दूसरी ओर भारत में एक ऐसा मरीज था जो हृदय रोग से ग्रस्त था। उसे तुरंत इलाज की जरूरत थी।
डॉक्टर प्रताप चंद रेड्डी ने उस मरीज को अमेरिका जाने की सलाह दी, क्योंकि भारत में उस समय कोई उपलब्ध नहीं था। लेकिन वह मरीज अमेरिका की यात्रा नहीं कर पाया और इसकी कीमत उसे अपनी जिंदगी देकर चुकानी पड़ी। वह बच नहीं सका।
इस घटना ने डॉक्टर प्रताप चंद रेड्डी को सोचने पर मजबूर कर दिया। इस घटना के दौरान उनकी उम्र 50 साल थी। अमेरिका में सेटल थे। सब कुछ था। लेकिन मरीज की मौत से वह बहुत आहत थे और उन्होंने भारत में हृदय रोग का अस्पताल खोलने की सोची।
अपने इस सपने के साथ डॉक्टर रेड्डी अमेरिका से भारत आ गए और भारत में एक वर्ल्ड-क्लास हेल्थ केयर सुविधा स्थापित करने का काम शुरू कर दिया। और जन्म हुआ Apollo Hospital का।
1983 में खुला पहला अपोलो हॉस्पिटल
भारत लौटने के बाद डॉक्टर रेड्डी के लिए वर्ल्ड-क्लास अस्पताल खोलना आसान नहीं था। उनके सामने कई चैलेंज आए।
डॉ. रेड्डी को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा, जिसमें बैंक लोन लेने में दिक्कत और इम्पोर्टेड मेडिकल इक्विपमेंट पर लगने वाले भारी 100% टैक्स से निपटना शामिल था।
उनके पक्के इरादे ने उन्हें 50 से ज्यादा बार दिल्ली पहुंचाया। आखिरकार, 1983 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के समर्थन से, डॉ. रेड्डी ने चेन्नई में पहला अपोलो हॉस्पिटल शुरू किया, जो 150 बेड वाली मल्टीस्पेशलिटी सुविधा थी और जिसने भारत में कॉर्पोरेट हेल्थ केयर की शुरुआत की।
डॉ. रेड्डी उस दौर को याद करते हुए कहते हैं, “जब मैंने 1980 के दशक में अपोलो हॉस्पिटल शुरू करने के बारे में लोगों को बताया, तो सबने मुझे बेवकूफ कहा। वही मेरी ताकत बनी और 1983 में पहला मल्टी-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल शुरू हुआ।“
डॉ. रेड्डी का जन्म 5 फरवरी 1933 को तमिलनाडु के अराकोंडा में हुआ था। डॉ. रेड्डी अपने परिवार में कॉलेज जाने वाले पहले व्यक्ति थे। हालांकि उनके पिता चाहते थे कि वे MBA करें, लेकिन डॉ. रेड्डी ने मेडिसिन को चुना।
स्टेनली मेडिकल कॉलेज से MBBS पूरा करने के बाद डॉ. रेड्डी UK में कार्डियोलॉजिस्ट के तौर पर ट्रेनिंग ली और बाद में USA चले गए। 1971 में परिवार के एक खत ने उन्हें भारत लौटने के लिए प्रेरित किया, जहां उन्होंने आखिरकार हेल्थकेयर को बदलने के अपने मिशन की शुरुआत की।
बेटी ने दिया नाम
अपोलो हॉस्पिटल का नाम डॉक्टर रेड्डी की दूसरी बेटी सुनीता ने दिया था। उनकी बेटी के अनुसार यह नाम दवा और इलाज से जुड़े ग्रीक देवता के नाम “अपोलो“ के नाम पर सुझाया था। इस अनोखी ब्रांडिंग ने अपोलो हॉस्पिटल्स को एडवांस मेडिकल केयर के प्रतीक के रूप में अलग पहचान बनाने में मदद की।
भारत के बुजुर्ग अरबपतियों में एक
अपोलो हॉस्पिटल के फाउंडर डॉक्टर प्रताप चंद रेड्डी का नाम आज भारत के सबसे बुजुर्ग अरबपतियों में गिना जाता है। वह 92 साल के हो चुके हैं। उनकी नेट वर्थ करोड़ों में है। फोर्ब्स की रियल टाइम लिस्ट के अनुसार इस समय डॉक्टर रेड्डी की नेटवर्थ $3.4B है।
बेटियों के हाथ में साम्राज्य
Cardiologist Prathap Reddy की 4 बेटियां है। चारों मिलकर बिजनेस देखती है। सबसे बड़ी बेटी प्रीथा रेड्डी और तीसरी बेटी शोभना एग्जीक्यूटिव वाइस चेयरपर्सन और एग्जीक्यूटिव चेयरपर्सन हैं। दूसरी बेटी सुनीता रेड्डी मैनेजिंग डायरेक्टर हैं और सबसे छोटी, संगीता रेड्डी जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर हैं।
कितनी बड़ी है Apollo Hospitals Enterprise?
अपोलो हॉस्पिटल्स एंटरप्राइज के पास 72 हॉस्पिटल्स और 6,000 से ज्यादा फार्मेसी की चेन है। डॉक्टर प्रताप चंद रेड्डी को स्वास्थ्य क्षेत्र में लगातार सामाजिक काम के लिए 1991 में पद्म भूषण और 2010 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। अपोलो हॉस्पिटल्स ने न सिर्फ भारत में हेल्थकेयर को एक बिजनेस के तौर पर देखने का नजरिया बदला है, बल्कि एक मजबूत इकोसिस्टम भी बनाया है जिसमें हॉस्पिटल, फार्मेसी और डिजिटल हेल्थ सर्विस शामिल हैं।
वर्तमान में Apollo Hospitals Enterprise Limited का मार्केट कैप 1,04,459.55 करोड़ रुपये है। |
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