सोती रही व्यवस्थाएं, रातभर ठिठुरते रहे लोग (फोटो: जागरण)
जागरण संवाददाता, पानीपत। शहर में बुधवार का न्यूनतम तापमान 4.3 डिग्री तापमान रहा जिसमें लोग घरों में तमाम सुविधाएं होने के बावजूद ठिठुरन महसूस कर रहे हैं। ऐसी हाड़ कंपा देने वाली ठंड में दैनिक जागरण ने जब शहर में बनाए गए रैन बसेरों की पड़ताल की तो प्रशासन के व्यवस्थाओं के दावों के विपरीत हालात देखने को मिले। बुधवार रात करीब पौने दस बजे शहर की सड़कों के किनारे लोग ठिठुरते नजर आए।
डेरा बाबा जोध सचियार से लेकर सिविल अस्पताल तक तीन किलोमीटर की दूरी में हर 200 मीटर की दूरी पर फुटपाथ पर खुले आसमान के नीचे लोग कहीं अलाव का सहारा लेते नजर आए तो कहीं फ्लाइओवर के नीचे ठंड से बचने का प्रयास करते नजर आए। इधर, नगर निगम की ओर से चार रैन बसेरे बनाने का दावा किया गया है।
इनमें से एक रैन बसेरे पर ताला लटका मिला जबकि एक रैन बसेरे का स्थानीय लोगों ने नहीं होने का दावा किया है। वहीं जागरण टीम तीसरे रैन बसेरे में पहुंची तो वहां गद्दे, रजाई और सुरक्षाकर्मी तो मिले लेकिन अलाव के लिए कोई हीटर या अन्य व्यवस्था देखने को नहीं मिली।
यहां पर बने रैन बसेरे पर ताला लटका मिला। जागरण टीम ने जब रैन बसेरे के अंदर खिड़की से झांकर देखा तो अंदर गद्दे, रजाई, पानी का कैंपर रखा हुआ था। गद्दे जमीन पर लगाए हुए मिले। मगर महिलाओं के लिए यहां पर अलग से कोई व्यवस्था नहीं दिखाई दी। टीम ने वहां पर कई बार आवाज भी लगाई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
यहां पर फ्लाइओवर के नीचे टीन का रैन बसेरा बनाया गया है। इसमें तीन लोग मिले। दो लोग रात के लिए ठहरे हुए थे। जबकि एक सुरक्षा कर्मी तैनात था। यहां पर जमीन पर ही गद्दे लगाए हुए थे। इसके अलावा तकिये, रजाई समेत अन्य व्यवस्था थी। लेकिन अलाव के लिए कोई प्रबंध नहीं था। कर्मचारी का कहना है कि यहां पर हर रोज दो से तीन लोग ठहरने के लिए आते हैं।
दैनिक जागरण की टीम रेलवे रोड पर रैन बसेरा ढूंढ़ने के लिए गई। वहां पर एक धर्मशाला में भी पूछा गया ,लेकिन वहां जाने के बाद पता चला कि अबकी बार रेलवे स्टेशन के आसपास रैन बसेरे की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। हालांकि रेलवे स्टेशन के पास लोग खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर हैं।
नगर निगम पानीपत के जेई सचिन ने कहा कि हर रैन बसेरे में रजाई, गद्दे समेत सभी व्यवस्था की गई हैं। किसी भी रैन बसेरे में किसी प्रकार की कोई अव्यवस्था नहीं है। |
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