search

Fisheries Investors Meet: अंडमान ही नहीं लक्ष्यदीप में भी भरपूर हैं कीमती टूना मछली, पढ़ें डिटेल

deltin55 1 hour(s) ago views 32

Fisheries Investors Meet हाल ही में लक्ष्यदीप में इन्वेस्टर्स मीट का आयोजन किया गया था. इससे पहले बीते साल अंडमान-निकोबार द्वीप में इन्वेस्टर्स मीट आयोजित की गई थी. दोनों ही इन्वेस्टर्स मीट के कार्यक्रम को एक बड़ी उम्मीद के तौर पर देखा जा रहा है. मीट बंगाराम द्वीप समूह में आयोजित की गई थी. खास बात ये है कि ये कोस्टल एरिया टूना मछली के लिए जाना जाता है. टूना के साथ ही यहां कुछ और भी ऐसी मछलियां हैं जिनकी इंटरनेशनल मार्केट में डिमांड है. मछलियों के इसी भंडार का फायदा उठाने और यहां के मछुआरों की जिंदगी में बदलाव लाने के लिए इसे सीफूड का हब बनाने की तैयारी चल रही है. दक्षिण-पूर्व एशिया से नजदीक होने के चलते दोनों ही राज्य बहुत खास हैं.
 
ऐसी ही कुछ जानकारियां देने के लिए इन्वेस्टर्स मीट आयोजित की जा रही हैं. इस मीट का आयोजन मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय की ओर से किया गया था. ये केंद्र शासित प्रदेश में आयोजित होने वाली अपनी तरह की पहली इन्वेस्टर्स मीट थी, जिसमे टूना और गहरे समुद्र की मत्स्य पालन, समुद्री शैवाल की खेती, सजावटी मत्स्य पालन और अपशिष्ट प्रबंधन आदि क्षेत्रों में काम करने वाले देशभर के करीब 22 निवेशकों और प्रमुख उद्यमियों ने देश भर से भाग लिया.





लक्ष्यदीप में मछली पकड़ने की पारंपरिक पद्धतियां इसे मरीन स्टीवर्डशिप काउंसिल (एमएससी) जैसी वैश्विक पर्यावरण लेबलिंग प्रणालियों के लिए आदर्श बनाती हैं, जिससे उच्च स्तरीय बाजारों और प्रीमियम कीमतों तक पहुंच संभव हो सकती है. स्मार्ट मछली पकड़ने वाले बंदरगाहों, कोल्ड चेन सुविधाओं और प्रसंस्करण इकाइयों सहित बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ बेड़े के आधुनिकीकरण के अवसर भी मौजूद हैं. इसके अलावा, ऑनबोर्ड भंडारण और प्रसंस्करण से लैस उन्नत मल्टी-गियर गहरे समुद्र में मछली पकड़ने वाले जहाजों और मछली एकत्र करने और परिवहन के लिए मदर वेसल्स के माध्यम से विकास संभव है. ये सभी पहलें मिलकर लक्षद्वीप को टिकाऊ और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी टूना मत्स्य पालन का केंद्र बनाने का वादा करती हैं.





केंद्रीय मत्स्य, पशुपालन पालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह ने इन्वेस्टर्स मीट के दौरान कहा कि भारत सरकार ने विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) के लिए मत्स्य पालन नियम जारी किए हैं. भारत के ईईजेड में मछली पकड़ने वाले मछुआरे अब अधिकृत "एक्सेस पास" के साथ कानूनी रूप से मछली पकड़ सकते हैं. वो अब उच्च मूल्य वाली टूना और अन्य मछली उत्पादों को अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में निर्यात कर सकेंगे. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार भारत के ईईजेड में मौजूद मत्स्य संसाधनों को अब भारतीय मूल के रूप में मान्यता दी जाएगी, जिससे मछली उत्पादों के निर्यात में और अधिक सुविधा होगी.



भारत सरकार ने 'खुले समुद्र में मछली पकड़ने के दिशानिर्देश' जारी किए हैं. अब भारतीय ध्वज वाले मछली पकड़ने वाले जहाजों को जलक्षेत्रों में मछली पकड़ने का कानूनी अधिकार प्राप्त है. उन्होंने निवेशकों से आगे आकर द्वीपों में मौजूद विशाल निवेश अवसरों का लाभ उठाने का आग्रह किया, जिनमें टूना जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियों के लिए अपार संभावनाएं हैं. इसकी वैश्विक स्तर पर काफी मांग है.







राज्य मंत्री, एफएएचडी प्रो. एसपी सिंह बघेल ने अपने संबोधन में लक्षद्वीप की अपार संभावनाओं पर प्रकाश डाला और वर्तमान 14 हजार टन उत्पादन और एक लाख टन की संभावित क्षमता के बीच के अंतर को खत्म  करने की आवश्यकता पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि ये द्वीप पोल-एंड-लाइन और हैंडलाइन विधियों का उपयोग करके उच्च गुणवत्ता वाली टूना मछली पकड़ने के लिए प्राकृतिक रूप से उपयुक्त हैं, जो अपनी स्वच्छ और टिकाऊ प्रथाओं के लिए विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त हैं. उचित ब्रांडिंग, प्रमाणन और आधुनिक मूल्य श्रृंखला विकास के साथ लक्षद्वीप की टूना उच्च स्तरीय अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच सकती है. उन्होंने निर्यातकों से नए बाजारों की खोज करने और मत्स्य पालन मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने के लिए मौजूदा सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाने का आग्रह किया.



ये भी पढ़ें-  मीट उत्पादन में 5वीं से 4 पोजिशन पर आया भारत, दूध-अंडे में पहले-दूसरे पर बरकरार


like (0)
deltin55administrator

Post a reply

loginto write comments
deltin55

He hasn't introduced himself yet.

410K

Threads

12

Posts

1210K

Credits

administrator

Credits
125230

Get jili slot free 100 online Gambling and more profitable chanced casino at www.deltin51.com