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Makar Sankranti 2026: क्यों श्री कृष्ण ने उत्तरायण को बताया मोक्ष का द्वार? गीता में छिपा गहरा राज

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गीता में श्रीकृष्ण ने किया था उत्तरायण का वर्णन (Image Source: AI-Generated)



धर्म डेस्क, नई दिल्ली। मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2026) केवल ऋतु परिवर्तन या पतंग उड़ाने का पर्व नहीं है, बल्कि यह वह समय है जब ब्रह्मांड में सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ जाता है। महाभारत के युद्ध के बीच, स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को इस समय की महिमा और इसके आध्यात्मिक महत्व के बारे में विस्तार से समझाया था।
गीता में उत्तरायण का वर्णन

श्रीमद्भगवद्गीता के आठवें अध्याय (अक्षरब्रह्म योग) में भगवान श्री कृष्ण मृत्यु के बाद आत्मा की गति के बारे में बताते हैं। श्री कृष्ण कहते हैं कि जो व्यक्ति अग्नि, प्रकाश, दिन के समय, शुक्ल पक्ष और उत्तरायण के 6 महीनों में शरीर त्यागता है, वह ब्रह्म (मोक्ष) को प्राप्त होता है। इसका अर्थ यह है कि इस समय पृथ्वी पर प्रकाश और चेतना का स्तर इतना ऊंचा होता है कि आत्मा को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिल जाती है।
भीष्म पितामह और सूर्य का उत्तरायण

इस महत्व का सबसे बड़ा उदाहरण महाभारत के भीष्म पितामह हैं। उन्हें इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था। बाणों की शय्या पर लेटे होने के बावजूद, उन्होंने कई दिनों तक कष्ट सहा लेकिन अपने प्राण नहीं त्यागे। उन्होंने मकर संक्रांति (उत्तरायण) के आने का इंतजार किया, क्योंकि वे जानते थे कि इस शुभ काल में शरीर त्यागने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और पुनर्जन्म नहीं लेना पड़ता।

  

(Image Source: AI-Generated)
देवताओं का दिन

शास्त्रों में माना गया है कि उत्तरायण देवताओं का \“दिन\“ होता है और दक्षिणायन उनकी \“रात्रि\“। जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर उत्तर की ओर बढ़ता है, तो इसे देवताओं की सुबह मानी जाती है। यही कारण है कि इस दौरान किए गए दान, तप और जप का फल अनंत गुना बढ़ जाता है। श्री कृष्ण की यह वाणी हमें सिखाती है कि जीवन में \“प्रकाश\“ (ज्ञान) की ओर बढ़ना ही असली उन्नति है। मकर संक्रांति हमें अंधेरे से उजाले की ओर बढ़ने का संदेश देती है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
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