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दूध पिलाने में लापरवाही से चार माह की बच्ची की मौत, हाथरस के परिवार में मातम

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सांकेतिक तस्वीर।



संवाद सहयोगी, जागरण. हाथरस। गांव तरफरा में चार माह की मासूम बच्ची की श्वास नली में दूध फंस जाने से मृत्यु हो गई। दूध पीने के बाद बच्ची मां की गोद में सो गई थी, लेकिन कुछ ही घंटों में उसकी सांसें थम गईं। मासूम की मृत्यु से पूरे गांव में मातम छा गया।
गांव तरफरा निवासी शकील की चार माह की बेटी अक्सा को सोमवार की रात में दूध पिलाया गया था। दूध पीने के बाद वह सामान्य रूप से सो गई, लेकिन कुछ देर बाद अचानक उसकी हालत बिगड़ने लगी।
दूध पीने के बाद मां की गोद में सो रही थी बच्ची, परिवार में छाया मातम

बच्ची को सांस लेने में दिक्कत हुई, जिससे घबराए स्वजन तुरंत उसे अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल में चिकित्सक ने जांच के बाद बच्ची को मृत घोषित कर दिया। बच्ची की मृत्यु के बाद स्वजन रोते-बिलखते नजर आए, इसके बाद शव को घर ले गए। इमरजेंसी मेडिकल आफिसर डा. वैभव शर्मा ने बताया कि प्रारंभिक आशंका है कि दूध श्वास नली में फंस गया था, जिससे बच्ची को सांस लेने में गंभीर परेशानी हुई और उसकी जान चली गई।
ये हुईं घटनाएं

  • तीन नवंबर 2025 को गांव जोगिया में नरेश के चार माह के बेटे व्यवांश की श्वास नली में दूध फंस जाने से मृत्यु हो गई।
  • आठ दिसंबर 2025 को गांव लाड़पुर में एक माह के बच्चे की श्वास नली में दूध फंस जाने से मृत्यु हो गई।
  • 30 अक्टूबर 2025 को सादाबाद के गांव गुतहरा में दो साल की बच्ची की श्वास नली में दूध फंस जाने से मृत्यु हो गई।
  • तीन जुलाई 2025 को गांव खिटौली निवासी अमित कुमार के में 10 माह के बेटे की श्वास नली में दूध फंस जाने से मृत्यु हो गई।
  • तीन सितंबर 2025 को गांव बघना में छह माह बच्चे की श्वास नली में दूध फंस जाने से मृत्यु हो गई।
  • 12 जून 2025 को गांव खरवा में ढाई माह के बच्चे की श्वास नली में दूध फंस जाने से मृत्यु हो गई।
  • 20 दिसंबर 2025 को गांव रघनियां में डेढ़ माह के बच्चे की श्वास नली में दूध फंस जाने से मृत्यु हो गई।


चिकित्सक की सलाह


डॉ. वैभव शर्मा ने बताया कि छोटे बच्चों को दूध पिलाते समय थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है। उन्होंने अभिभावकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। बच्चे को लिटा कर दूध न पिलाएं। दूध पिलाते समय बच्चे का सिर पैरों से ऊंचा रखें।

दूध पिलाने के बाद बच्चे को कंधे से लगाकर पीठ थपथपाएं, ताकि डकार आ सके। यह सुनिश्चित करें कि बच्चा दूध पीने के बाद डकार जरूर ले। अगर बच्चे को सांस लेने में परेशानी हो या सांस लेते समय अजीब आवाज आए, तो तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।
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