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दही-चूड़ा भोज में बोले लालू यादव—तेज प्रताप को मेरा आशीर्वाद, अब परिवार के साथ ही रहेगा

LHC0088 2026-1-14 12:59:29 views 401
  



डिजिटल डेस्क, पटना।मकर संक्रांति के मौके पर तेज प्रताप यादव के आवास पर आयोजित दही-चूड़ा भोज में राजनीति से ज्यादा परिवार की बात होती नजर आई। सात महीने बाद तेज प्रताप के घर पहुंचे राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने साफ शब्दों में कहा कि वे बेटे तेज प्रताप से नाराज नहीं हैं और उनका आशीर्वाद हमेशा उसके साथ रहेगा। लालू के इस बयान को तेज प्रताप की राजनीतिक और पारिवारिक वापसी के तौर पर देखा जा रहा है।

दही-चूड़ा भोज के दौरान मीडिया से बातचीत में लालू यादव ने कहा कि परिवार में मतभेद होते रहते हैं, लेकिन इसका मतलब दूरी नहीं होता।

उन्होंने दो टूक कहा कि तेज प्रताप अब परिवार के साथ ही रहेगा। लालू का यह बयान ऐसे समय आया है, जब लंबे समय से यह चर्चा चल रही थी कि तेज प्रताप पार्टी और परिवार से अलग-थलग पड़ गए हैं।

तेज प्रताप के बीजेपी में जाने की अटकलों पर भी लालू यादव ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बेटे को हमेशा उनका आशीर्वाद मिलेगा, वह जहां भी रहेगा, खुश और सफल रहे, यही उनकी कामना है।

लालू के इस जवाब को सियासी संकेतों से ज्यादा भावनात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जिससे यह साफ होता है कि परिवार के स्तर पर रिश्तों में नरमी आई है।

इस दही-चूड़ा भोज में कई राजनीतिक हस्तियां भी मौजूद रहीं। राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, साधु यादव, प्रभुनाथ यादव और चेतन आनंद की उपस्थिति ने इस आयोजन को और खास बना दिया।

खासकर साधु यादव की मौजूदगी इसलिए चर्चा में रही, क्योंकि अतीत में उनके और तेज प्रताप के रिश्तों में तल्खी रही है। अब एक ही मंच पर नजर आना सियासी गलियारों में नए संकेत दे रहा है।

हालांकि, इस आयोजन में तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी रही।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भले ही सभी रिश्ते एक साथ सामान्य न हुए हों, लेकिन लालू यादव की मौजूदगी ने यह संदेश जरूर दे दिया है कि परिवार को जोड़ने की कोशिशें तेज हो गई हैं।

तेज प्रताप यादव ने भी इस मौके पर कहा कि दही-चूड़ा भोज उनकी ओर से परंपरा और रिश्तों को निभाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि वे सभी बड़े नेताओं और परिवारजनों का सम्मान करते हैं और यही उनकी राजनीति की पहचान है।

कुल मिलाकर, तेज प्रताप के आवास पर हुआ यह दही-चूड़ा भोज सिर्फ एक पर्व आयोजन नहीं रहा, बल्कि लालू यादव के आशीर्वाद के साथ रिश्तों में आई गर्मजोशी और सियासी संकेतों का केंद्र बन गया।
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