सेक्टर 30 स्थित चाइल्ड पीजीआई में थैलेसीमिया एवं ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डा. लारेंस फाल्कनर ने अपनी टीम के साथ बीएमटी यूनिट का निरीक्षण किया। सौ. प्रबंधन
जागरण संवाददाता, नोएडा। सेक्टर-30 स्थित चाइल्ड पीजीआई में हेमेटोलाजी आन्कोलाजी विभाग की वरिष्ठ चिकित्सक ने अपनी टीम के साथ डेढ़ वर्ष में थैलेसीमिया और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से ग्रस्त 94 बाल मरीजों का बोनमैरो ट्रांसप्लांट करने में सफलता हासिल की है। पीडियाट्रिक बोनमैरो ट्रांसप्लांट यूनिट का मंगलवार को थैलेसीमिया और ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ ने अपनी टीम ने दौरा किया। इस बीच आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बाल मरीजों के लिए बीएमटी कार्यक्रमों की स्थापना में विशेष योगदान दिया।
हेमेटोलाजी विभाग की हेड डा. नीता राधाकृष्णन ने बताया कि थैलेसीमिया और ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डा. लारेंस फाल्कनर, शोभा तुली, (थैलेसेमिक्स इंडिया), डा. जैनुल ऐबुद्दीन और बाल आयुष फाउंडेशन से ललित परवार थे। प्रो. फाल्कनर थैलेसीमिया और अन्य हीमोग्लोबिनोपैथी के लिए उपचारात्मक थेरेपी पर अपने फोकस के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाने जाते हैं। वह क्योर टू चिल्ड्रन फाउंडेशन (फ्लोरेंस, इटली) के मेडिकल डायरेक्टर हैं।
उन्होंने भारत और अन्य देशों में उच्च-गुणवत्ता वाले व कम लागत के बीएमटी कार्यक्रम की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रतिनिधिमंडल ने निदेशक डा. अरुण कुमार सिंह और पीडियाट्रिक हेमेटोलाजी आन्कोलाजी, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन व संबद्ध सेवाओं के विभागों की फैकल्टी, नर्सिंग, तकनीकी टीमों से बातचीत की। इस बीव ट्रांसप्लांट कार्यक्रम की क्लिनिकल और शैक्षणिक प्रगति की समीक्षा की।
उन्हें बताया कि पीडियाट्रिक बीएमटी कार्यक्रम का उद्घाटन 2020 में हुआ था। जून 2024 से एक नई अत्याधुनिक यूनिट के साथ मजबूत हुई। 2025 तक 94 पीडियाट्रिक बोन मैरो ट्रांसप्लांट पूरे कर लिए गए हैं। डा. नीता के मुताबिक सभी मरीज थैलेसीमिया, एप्लास्टिक एनीमिया, ल्यूकेमिया, प्राथमिक इम्यूनोडेफिशिएंसी और अन्य दुर्लभ मैरो फेलियर सिंड्रोम से ग्रस्त हैं। |