निर्माण भारत में ही लगभग 30 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री के साथ किया जाएगा
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में भारत इस सप्ताह रक्षा मंत्रालय की उच्च स्तरीय बैठक में फ्रांस से लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये के 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के सौदे पर चर्चा करने जा रहा है। इनका निर्माण भारत में ही लगभग 30 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री के साथ किया जाएगा।
दिलचस्प बात यह है कि भारत, फ्रांस के साथ इस समझौते को ऐसे समय में आगे बढ़ा रहा है जब अमेरिका और रूस दोनों ने भारतीय वायु सेना को अपने पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान, जिनमें क्रमश: एफ-35 और एसयू-57 शामिल हैं, देने की पेशकश की है।
सोर्स कोड फ्रांसीसी पक्ष के पास रहेंगे
अगले दो-तीन दिनों में होने वाली रक्षा मंत्रालय की उच्च स्तरीय बैठक में चर्चा के लिए रखे जाने वाले प्रस्ताव के अनुसार, इस सौदे में भारतीय वायु सेना द्वारा लगभग 12-18 राफेल जेट विमानों को अधिग्रहित करना भी शामिल होगा। भारतीय पक्ष फ्रांस से यह भी अनुरोध कर रहा है कि वह सरकार-से-सरकार समझौते के तहत भारतीय हथियारों और अन्य स्वदेशी प्रणालियों को फ्रांसीसी विमानों में एकीकृत करने की अनुमति दे।
सोर्स कोड केवल फ्रांसीसी पक्ष के पास ही रहेंगे। राफेल लड़ाकू विमानों में स्वदेशी घटक केवल 30 प्रतिशत के आसपास होंगे। आम तौर पर, मेक इन इंडिया परियोजनाओं में स्वदेशी घटक की आवश्यकता 50-60 प्रतिशत होती है। बहरहाल, अगर मंजूरी मिल जाती है तो यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा रक्षा सौदा होगा और इससे भारतीय सेना में राफेल जेट की संख्या 176 हो जाएगी।
वायु सेना के पास पहले से ही 36 जेट
भारतीय वायु सेना के पास पहले से ही 36 जेट हैं, जबकि भारतीय नौसेना ने पिछले साल 26 जेट का आर्डर दिया था। भारतीय वायु सेना द्वारा तैयार किए गए 114 राफेल जेट के प्रस्ताव का विवरण रक्षा मंत्रालय को कुछ महीने पहले प्राप्त हुआ था। रक्षा मंत्रालय से मंजूरी मिलने के बाद, इस प्रस्ताव को कैबिनेट कमेटी आन सिक्योरिटी से अंतिम मंजूरी लेनी होगी।
गौरतलब है कि इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने का कदम आपरेशन सिंदूर में राफेल के शानदार प्रदर्शन के तुरंत बाद उठाया गया, जहां इसने अपने \“स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट\“ का उपयोग करके चीनी पीएल-15 हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया था।
(न्यूज एजेंसी एएनआई के इनपुट के साथ) |
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