मप्र में एसआईआर का दूसरा चरण जारी। (प्रतीकात्मक चित्र)
डिजिटल डेस्क, भोपाल। सदैव चुनावी मोड में रहने वाली भाजपा ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के काम को भी सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा हुआ है। आने वाले चुनावों में भाजपा एसआईआर का पूरा लाभ लेने की तैयारी में है, इसलिए 22 जनवरी तक इसके दूसरे चरण में भाजपा ने पूरी ताकत लगा दी है।
संगठन को किया सक्रिय
पार्टी ने इस दौरान बूथ स्तर तक नव मतदाताओं का नाम जुड़वाने के लिए संगठन को सक्रिय किया है। भाजपा ने अगले 10 दिन हर बूथ से नए मतदाता बनाने का लक्ष्य रखा है। संगठन इस अभियान को लेकर खासा सक्रिय है। संगठन के साथ सभी सांसद- विधायक भी एसआईआर के काम में मोर्चा संभालेंगे। पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा गया है कि यदि किसी मतदाता के नाम पर संशय हो तो वे आपत्तियां प्रस्तुत करें।
बता दें, प्रदेश में मतदाता सूची के शुद्धीकरण के लिए एसआईआर का दूसरा चरण चल रहा है। नाम जोड़ने-हटाने के लिए दावा-आपत्तियां प्राप्त किए जा रहे हैं, इनका निराकरण करके 21 फरवरी को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन होगा।
नए मतदाताओं पर फोकस
मध्य प्रदेश में एसआइआर के तहत जारी ड्राफ्ट लिस्ट में 42 लाख 47 हजार वोटर कम होने के बाद भाजपा अब नए मतदाताओं का नाम जुड़वाने के अभियान में लगी है। लगभग इतने ही नए मतदाता जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। सांसद- विधायकों के अलावा सभी मंत्रियों को भी नए मतदाता जुड़वाने की जिम्मेदारी दी गई है।
मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों को अपने प्रभार वाले जिलों में मोर्चे पर जमे रहने को कहा गया है। वरिष्ठ मंत्री राकेश सिंह को इसमें प्रशासनिक समन्वय का काम दिया गया है। भाजपा का यह भी मानना है कि सूची में अपात्र लोगों को पात्र बनने की प्रक्रिया से भी अवगत कराना सरकार की जिम्मेदारी है।
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42 लाख से ज्यादा नाम कटे
बता दें, 22 साल बाद हुए एसआइआर में सभी 71,930 मतदान केंद्रों पर मतदाता सूची के प्रारूप का प्रकाशन किया गया। अलग-अलग श्रेणियों में 42,74,160 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। इनमें अधिकतर शहरी क्षेत्रों के हैं।
राजनीतिक नियुक्तियां टलीं
उधर, केंद्रीय नेतृत्व ने एसआईआर के दूसरे चरण तक राजनीतिक नियुक्तियां नहीं करने का सुझाव भी दिया है। कहा गया है कि इस दौरान ऐसा कोई कार्य नहीं करना है कि एसआईआर का काम प्रभावित हो। प्रदेश में भी लंबे समय बाद निगम- मंडलों में नियुक्तियों की तैयारी लगभग कर ली गई है। ऐसा माना जा रहा था कि मकर संक्रांति के बाद इसे मूर्त रूप दे दिया जाएगा, लेकिन संभावना है कि इसे भी 22 जनवरी तक टाल दिया जाए। |
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