जागरण संवाददाता, उन्नाव। सदर क्षेत्र के दरियाईखेड़ा निवासी शिव जायसवाल के घर नकदी-जेवर चोरी के आरोपित की बहन, मां व पिता को पूछताछ के नाम पर कोतवाली लाने अवैध उगाही व रात भर लाकअप में रखने के आरोप में उन्नाव पुलिस कटघरे में हैं। आरोपित की बहन रूबी सिंह की याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कड़ा रुख अपना प्रदेश के मुख्य सचिव को तीन सप्ताह के अंदर व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने या खुद अगली सुनवाई 29 जनवरी 2026 को पेश होने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अब्दुल मोइन और न्यायमूर्ति बाबिता रानी की खंडपीठ ने याचिका की सुनवाई के दौरान पारित किया है।
बाराबंकी जिले के खैरा बीज कुनकू निवासी शिव जायसवाल मौजूदा समय में उन्नाव सदर क्षेत्र के कब्बाखेड़ा दरियाईखेड़ा मुहल्ला में रहते हैं। पांच अगस्त 2025 को उन्होंने लोकनगर मुहल्ला निवासी सचिन, संदीप व राजेंद्री पर आराेप लगा सदर कोतवाली में तहरीर देकर बताया था कि उन्होंने घर में टाइल्स लगवाने का कार्य ठेकेदार संदीप व सचिन को दिया था। 14 जुलाई 2025 से 28 जुलाई के बीच दोनों ने काम किया। तीन अगस्त 2025 को वह अपने गांव खैरा जाने की तैयारी कर रहा था। अलमारी से जब ज्वैलरी लेने पहुंचा तो 10 हजार रुपये व लाखों कीमत की ज्वैलरी गायब थी।
शक होने पर संदीप ठेकेदार से पूछताछ की तो उसने चोरी की बात स्वीकार करते हुए सचिन को भी इसमें शामिल बताया। संदीप ने यह भी बताया कि कुछ सामान उसने बेच दिया है जबकि, अन्य जेवर उसकी मां राजेंद्री के पास है। शिव जायसवाल की तहरीर पर पुलिस ने सात अगस्त को रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की। संदीप की बहन रूबी सिंह ने इसी मामले में हाईकोर्ट लखनऊ पीठ में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि कोतवाली पुलिस ने पांच से आठ अगस्त के बीच पूछताछ के दौरान मानसिक प्रताड़ित किया।
सात अगस्त 2025 की रात अवैध रूप से रात में लाकअप में रखा। पुलिस कर्मियों ने उस पर अभद्र टिप्पणी कर प्रताड़ना दी। उसकी मां राजेंद्री व भाई संदीप को भी पूछताछ के लिए कोतवाली में रखा। इतना ही नहीं नकदी मोबाइल फोन जब्त कर लिए। 10 हजार रुपये लेकर घर के दो लोगों को छोड़ा। रूबी सिंह ने कोतवाली मे लगे कैमरों की पांच अगस्त से आठ अगस्त की फुटेज निकलवाकर सच देखे जाने की बात कही।
उन्नाव एसपी की ओर से कोर्ट के समक्ष व्यक्तिगत हलफनामा दायर कर यह स्वीकार किया गया कि याची व पुलिस कर्मियों के बीच धन से संबंधित बातचीत हुई लेकिन धन लेने की बात प्रमाणित नहीं हुई। सिपाहियों का व्यवहार पुलिस आचरण के खिलाफ होने से एसपी ने 17 दिसंबर 2025 को पुलिस कर्मी संजय भाठी व अर्पित को लाइन हाजिर कर प्रारंभिक जांच बैठा दी। कोर्ट ने पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई को हल्के और लापरवाह रवैये वाला बताया है।
फुटेज न देने पर कोर्ट ने जताई नाराजगी
राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि 5 अगस्त से 8 अगस्त 2025 की सीसी कैमरों की फुटेज उपलब्ध नहीं है। यह तथ्य पेश किया कि डीजीपी के जारी 20 जून 2025 के सर्कुलर के अनुसार केवल दो से ढाई महीने तक ही फुटेज सुरक्षित रहती है। इस पर कोर्ट ने कहा कि यह सर्कुलर सुप्रीम कोर्ट के दो दिसंबर 2020 के आदेश (परमवीर सिंह सैनी बनाम बलजीत सिंह) के विपरीत है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि पुलिस थानों की सीसी कैमरों की फुटेज कम से कम छह महीने तक सुरक्षित रखी जानी चाहिए। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया डीजीपी के इस सर्कुलर को सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना माना है। यह भी कहा कि किसी महिला को उसके निवास स्थान के अलावा कहीं बुलाना प्रतिबंधित है। बावजूद इसके, याचिकाकर्ता महिला को थाने बुलाना कानून का उल्लंघन है।
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इन्हें भेजा जा चुका है जेल
पुलिस ने शिव जायसवाल की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज करने के बाद सचिन व याचिकाकर्ता रूबी की मां राजेंद्री को चोरी का माल बरामद करने के बाद जेल भेजा था। संदीप की बहन रूबी ने पुलिस पर प्रताड़ना का आरोप लगा हाईकोर्ट लखनऊ बेंच में याचिका दायर की थी।
हाईकोर्ट के आदेश का पालन किया जाएगा। पूर्व में कैमरों के लिए जो बजट मिला, उसी हिसाब से प्रदेश भर के थाना-कोतवाली में कैमरे लगाए गए थे। अब दोबारा बजट जारी हुआ है। शीघ्र ऐसे डीवीआर सेट लगाए जाएंगे, जिसमें छह माह व उससे अधिक रिकार्डिंग सुरक्षित रह सके।
जयप्रकाश सिंह, एसपी |
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