ईवी स्कूल में ब्लास्ट से शिव कुमार की मौत हो गई। जागरण
जागरण संवाददाता, नारनौल। शहर की रामनगर काॅलोनी में सोमवार रात इलेक्ट्रिक स्कूटी चार्जिंग के दौरान हुए जोरदार ब्लास्ट से एक परिवार की जिंदगी तबाह हो गई। कमरे में चार्जिंग पर लगी स्कूटी की बैटरी फटने से 55 वर्षीय श्रमिक शिव कुमार की मौत हो गई, जबकि आग लगने से घर का काफी सामान जलकर नष्ट हो गया।
इस हादसे ने एक बार फिर घरों में इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग को लेकर गंभीर सुरक्षा खतरे को उजागर कर दिया है। मूल रूप से गांव बड़कोदा निवासी शिव कुमार कई साल से नारनौल में रहकर श्रमिक का कार्य कर रहा था। वह रामनगर काॅलोनी स्थित अपने मकान में परिवार के साथ रहता था।
रात के समय वह अपनी इलेक्ट्रिक स्कूटी को कमरे में चार्जिंग पर लगाकर वहीं सो रहा था, जबकि परिवार के अन्य सदस्य दूसरे कमरे में थे। रात करीब साढे नौ बजे अचानक स्कूटी की बैटरी तेज धमाके के साथ फट गई। धमाके के साथ ही कमरे में आग भड़क उठी और कुछ ही देर में पूरा कमरा लपटों से घिर गया।
तेज आवाज सुनकर पड़ोसी जाग गए और तुरंत मौके पर पहुंच गए। लोगों ने पुलिस, एम्बुलेंस और दमकल विभाग को सूचना दी। सूचना मिलते ही दमकल की गाड़ी मौके पर पहुंची और करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। दमकल कर्मियों ने जले हुए कमरे से शिव कुमार को बाहर निकाला।
पुलिस ने उसे एम्बुलेंस से नागरिक अस्पताल भिजवाया, जहां डाॅक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। आग लगने से कमरे में रखा बेड, सोफा, फर्नीचर, किवाड़ और अन्य घरेलू सामान जलकर राख हो गया। बताया गया है कि शिव कुमार ने यह लाल रंग की टोक्समो कंपनी की राइनो प्लस इलेक्ट्रिक स्कूटी करीब एक साल पहले नसीबपुर स्थित एक शोरूम से खरीदी थी।
यह लो स्पीड श्रेणी की स्कूटी है, जिसके लिए न आरटीए रजिस्ट्रेशन की जरूरत होती है और न ही ड्राइविंग लाइसेंस की। इसी कारण इस तरह की स्कूटियां आम लोगों में तेजी से प्रचलित हो रही हैं, लेकिन सुरक्षा मानकों को लेकर इन पर सवाल भी उठ रहे हैं। शिव कुमार की दो बेटियां और एक बेटा हैं, तीनों शादीशुदा हैं। एक बेटी ग्रुप डी की सरकारी नौकरी में है।
अचानक हुए इस हादसे से पूरा परिवार सदमे में है। यह हादसा साफ करता है कि घरों के भीतर इलेक्ट्रिक स्कूटी चार्ज करना और सस्ती या असुरक्षित बैटरियों का इस्तेमाल जानलेवा साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के वाहनों की बिक्री और चार्जिंग सुरक्षा को लेकर सख्त मानक और जागरूकता बेहद जरूरी है, ताकि ऐसे दर्दनाक हादसों को रोका जा सके।
यह भी पढ़ें- अब ब्लड के लिए मरीजों को नहीं जाना पड़ेगा नारनौल या रेवाडी, कनीना-अटेली सीएचसी में ही मिलेगी सुविधा |
|