आम जनता को राहत की उम्मीद, सस्ता होगा बालू। (फाइल फोटो)
राज्य ब्यूरो, रांची। प्रदेश में पेसा नियमावली लागू होने के बाद अब विभिन्न जिलों में बालू घाटों की नीलामी की प्रक्रिया में काफी तेजी आ गई है। इसी क्रम में सिमडेगा और लोहरदगा जिले में बालू घाटों की नीलामी प्रक्रिया पूर्ण की जा रही है।
विभिन्न जिलों में प्रशासन अपने क्षेत्राधिकार में आने वाले बालू घाटों की नीलामी पूरी करने में तत्परता दिखा रहे हैं। झारखंड के सभी 24 जिलों को मिलाकर कुल 444 बालू घाटों की नीलामी प्रक्रिया पूर्ण करने की तैयारी है, जिससे आने वाले समय में निर्माण कार्यों के लिए बालू की उपलब्धता बढ़ेगी।
हाईकोर्ट की रोक के बाद अब नीलामी का रास्ता साफ
राज्य में पेसा नियमावली लागू नहीं होने के कारण पूर्व में झारखंड हाईकोर्ट ने बालू घाटों व लघु खनिजों के आवंटन पर रोक लगा रखी थी।
अब जब राज्य में नई नियमावली लागू हो गई है, तो उम्मीद है कि सभी जिला प्रशासन जल्द ही नीलामी प्रक्रिया पूरी कर आवंटन का काम संपन्न कराएंगे।
\“द झारखंड सैंड माइनिंग रुल्स-2025\“ के तहत संबंधित जिलों में कैटेगरी-02 के बालू घाटों या घाटों के समूहों की ई-नीलामी की जाएगी। इसी कड़ी में लोहरदगा और सिमडेगा जिला प्रशासन द्वारा नीलामी की तिथियां भी जारी कर दी गई हैं।
सिमडेगा और लोहरदगा के इन घाटों के लिए बोली
सिमडेगा जिले में 22 जनवरी को कुल 14 बालू घाटों की नीलामी की जाएगी। इनमें प्रमुख रूप से गोरा, रामजल, लताकेल, कोनारोइया, सोगरा-नानेसेरा, कोचेडेगा, पिथरा-02 एवं तिलगा, पिथरा एवं पोथाटोली, पैकपारा और कोरोमिया बालू घाट शामिल हैं।
वहीं, लोहरदगा जिले में चार फरवरी को 13 बालू घाटों की नीलामी होनी है। लोहरदगा के प्रमुख घाटों में गितिलगढ़-खरता, डोबा, कोलसिमरी-डोबा, लावागाई-नदीनगड़ा, हरमू-भक्सो, कैमो-भक्सो, बरगांव-कैमो, जुरिया-तिगरा, डांडू-मेढ़ो, एकागुडी-मेढ़ो, सेन्हा-मेढ़ो, जोगना-मेढ़ो और उगरा-भड़गांव के नाम शामिल हैं।
घटेंगे दाम: रांची समेत पूरे राज्य में बदलेगा माहौल
झारखंड में बालू घाटों की नीलामी प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही बालू की दरों में सुधार देखने को मिल रहा है। राज्य में एक बार फिर बालू की कीमतें कम होने लगी हैं, हालांकि अभी तक सभी घाटों की नीलामी पूर्ण नहीं हुई है।
अधिकारियों का मानना है कि राज्य में चिह्नित 400 से अधिक बालू घाटों की नीलामी से संबंधित प्रक्रिया जैसे ही पूर्ण होगी, वैसे ही राजधानी रांची समेत सभी जिलों में बालू की दर में बड़ी कमी आएगी।
इससे आम जनता को घर बनाने में सुविधा होगी और सरकारी निर्माण कार्यों की लागत में भी गिरावट दर्ज की जाएगी। प्रॉपर नीलामी नहीं होने से मनमानी दामों में अवैध बालू की बिक्री हो रही थी। इससे राजस्व का नुकसान हो रहा था। |