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रोबोट करेगा मनेरी-भाली सुरंग में रिसाव की जांच, 1500 लीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से रिस रहा पानी

deltin33 2026-1-13 08:26:46 views 283
  

प्रतीकात्मक तस्वीर



जागरण संवाददाता, उत्तरकाशी। लंबे समय से मनेरी-भाली फेज-टू जल-विद्युत परियोजना की हेड रेस टनल (एचआरटी) में हो रहा पानी का रिसाव जल विद्युत निगम के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। इसे देखते हुए निगम अब सुरंग में रोबोट भेजने की तैयारी कर रहा है।

पानी में उतरकर जांच करने में सक्षम यह रोबोट सुरंग के अंदर के फोटो व वीडियो उपलब्ध कराएगा। इसके लिए विशेषज्ञों की टीम जल्द सुरंग का निरीक्षण करेगी। सुरंग से करीब 1,500 लीटर प्रति सेकंड तक पानी का रिसाव हो रहा है। वर्ष 2021 में मरगांव चमियारी के पास भारी रिसाव के चलते मरगांव की सिंचाई नहर का एक हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हो गया।

तब से अब तक इस क्षेत्र में रिसाव के उपचार पर निगम तीन करोड़ से अधिक की धनराशि खर्च कर चुका है, लेकिन रिसाव फिर भी नहीं थम पाया।

उत्तरकाशी जिले में 304 मेगावाट क्षमता की मनेरी-भाली फेज-टू जल-विद्युत परियोजना वर्ष 2008 में बनकर तैयार हुई। हालांकि, परीक्षण के दौरान ही जोशियाड़ा से धरासू तक जाने वाली करीब 16 किमी लंबी सुरंग में कुछ स्थानों पर पानी का रिसाव होने लगा था।

तब रिसाव का उपचार कर परियोजना को शुरू किया गया, लेकिन चिन्यालीसौड़ क्षेत्र में गमरीगाड के पास रिसाव की समस्या बनी रही। इस रिसाव की जांच के लिए विशेषज्ञों की एक टीम रिमोट ऑपरेटेड व्हीकल (आरओवी) की मदद लेगी, जो संभवत: फरवरी प्रथम सप्ताह में सुरंग के अंदर पानी में उतरकर रिसाव वाले स्थान की उच्च गुणवत्ता के फोटो व वीडियो उपलब्ध कराएगा। इससे रिसाव वाले स्थान की वास्तविक स्थिति का पता चल सकेगा।

क्लोजर लेकर धरासू पावर हाउस से भेजा जाएगा रोबोट

जल विद्युत निगम के अनुसार सुरंग में आरओवी उतारने के लिए एक से डेढ़ दिन का क्लोजर लिया जाएगा, जो कि धरासू पावर हाउस से होते हुए उत्तरकाशी की ओर करीब तीन किमी तक जाएगा। वह गमरीगाड क्षेत्र के आसपास हो रहे रिसाव की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए वीडियो बनाएगा। विशेषज्ञों की टीम में एनएचपीसी, सिंचाई विभाग व टीएचडीसी के विशेषज्ञ शामिल हैं।



हाई पावर कमेटी की निगरानी में सुरंग के रिसाव का उपचार प्रस्तावित है, जिसमें विशेषज्ञों की टीम रिसाव की जांच को पहुंचेगी। इसी दौरान एक रोबोट उतारकर सुरंग में हो रहे रिसाव की जांच की जाएगी।


                                                                 विमल डबराल, जनसंपर्क अधिकारी, जल-विद्युत निगम
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