फिल्म अभिनेता समीर सोनी (फोटो क्रेडिट- इंस्टाग्राम)
एंटरटेनमेंट डेस्क, मुंबई: फिल्म, टीवी, थिएटर से लेकर अब डिजिटल प्लेटफार्म तक अभिनेता समीर सोनी ने हर दौर को करीब से जिया है। अलग–अलग तरह के किरदार निभाकर उन्होंने खुद को बार-बार साबित किया है। हाल ही में वेब सीरीज ‘छुपा रुस्तम बिलेनियर’ में नजर आए समीर का मानना है कि कलाकार के लिए सबसे जरूरी है अपनी मौलिकता को बनाए रखना। दैनिक जागरण के मंच पर उनसे हुई बातचीत के प्रमुख अंश :
अब डिजिटल का दौर है, पहले के दौर और अब के दौर में किसे ज्यादा कठिन पाते हैं?
हर माध्यम के अपने चैलेंज होते हैं। अपनी अच्छाई-बुराई होती है। आपको उसके साथ सामंजस्य बनाना होता है। पहले फिल्मों का दौर था, तब कहा जाता था कि टीवी कौन करता है। फिर अमिताभ बच्चन, शाह रुख खान, सलमान जैसे बड़े सितारे टीवी पर आए। अब ओटीटी का दौर है। हर दौर अच्छा है, बस आपको खुद को उसके अनुसार ढालना होता है।
क्या यह कहना सही होगा कि इंडस्ट्री से आपको योग्यता के अनुसार सम्मान नहीं मिला?
वो दौर अब पीछे छूट चुका है। मैंने उसे कब का स्वीकार कर लिया। मेरी किस्मत में जितना लिखा था उतना मिला। मैं अपने काम का लुत्फ लेता हूं। l कलाकार की छवि काम से बनी होती है।
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ऐसे में उसकी वास्तविक चीजें सामने आना कितना जरूरी मानते हैं?
मेरी पहली फिल्म साल 1988 में आई थी। उस समय अभिनेता राजेश खन्ना का करियर ढलान पर था। जब मैं बाजार जाता हूं तो आम लोगों की तरह ही खरीदारी करता हूं, लेकिन जब एक्टिंग कर रहा होता हूं तो कोई दूसरा इंसान होता हूं। अगर वास्तविक जीवन में भी मैं एक्टिंग करता रहूं, तो आदमी पागल हो जाएगा। मेरे लिए जरूरी है कि आप जैसे हैं वैसे रहे।
आपने बिग बॉस भी किया था?
बिग बॉस करने से पहले ही तीन साल से शो का ऑफर आ रहा था। तब मैंने मना कर दिया था। मुझे लगा कि लोग पता नहीं क्या कहेंगे। आखिर में सोचा कि खुद पर भरोसा होना चाहिए। आपको मेरी जिंदगी में ड्रामा नहीं मिलेगा। जिन्होंने कभी एक्टिंग नहीं की है, 12 घंटे सेट पर नहीं बिताए हैं, उन्हें नहीं पता कि काम खत्म होने के बाद कलाकार की मानसिक अवस्था क्या होती है। घर आने पर आपको एक-दो घंटा तो सामान्य होने में लगता है।
बीच में आपने फिल्में देखना बंद कर दिया था। जबकि अपनी कला को निखारने के लिए कलाकार दूसरों का काम भी देखते हैं?
देखिए यह दोधारी तलवार है। यह आपको सीखा भी सकता है और प्रभावित भी कर सकता है। पहले चार-पांच साल मैंने हिंदी फिल्में नहीं देखी थीं। इसकी वजह यह थी 2000 के आसपास हर कोई अमिताभ बच्चन बनना चाहता था। एक लेखक ने कहा था कि सर आपके लिए ऐसा सीन लिखा है जैसे फिल्म शराबी में बच्चन साहब करते हैं, तो सर पकड़ लिया। मैंने कहा कि मेरा लक्ष्य रहा कि किसी की नकल न करुं।
आपकी पत्नी और अभिनेत्री नीलम की किन खूबियों के बारे में बाद में पता चला?
ईमानदारी से कहूं तो उन्हें देखकर मैं फिसल गया था। मुझे उनसे सुंदर लड़की नहीं मिल सकती थी। वह जिस गरिमा से खुद को पेश करती हैं वो मुझे पसंद है। वह कहीं भी रहे, उन्हें चिंता रहती है कि घर में खाना क्या बनेगा।
आप किन मामलों में छुपे रुस्तम हैं?
मैंने कहीं सुना था कि अगर कोई चुप है तो इसका यह मतलब नहीं है कि वो आपसे सहमत है। अगर मुझे कुछ गलत लगता है तो उसे थोड़ा सा सही करुंगा। उसके बाद मुझे समझ आ जाएगा कि मैं समय बर्बाद कर रहा हूं। उस इंसान का जो मानना है, वो वही है। तो मैं उससे सहमति जता दूंगा। हालांकि, दिमाग में चल रहा है कि कैसे समझाऊं कि बकवास कर रहा है।
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