Delhi News: दिल्ली हाई कोर्ट ने क्रिकेट सट्टेबाजी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामलों पर एक अहम निर्णय सुनाया है. कोर्ट ने कहा कि क्रिकेट पर सट्टा लगाना भले ही PMLA की अनुसूची में शामिल अपराध नहीं है, लेकिन अगर सट्टेबाजी में लगाया गया पैसा किसी अवैध रूप से अर्जित संपत्ति से आया हो, तो उससे होने वाला लाभ अपराध से अर्जित कमाई माना जाएगा. जस्टिस अनिल की बेंच ने अपने 36 पन्नों के फैसले में साफ किया कि अवैध स्रोत से आया पैसा या गैर-कानूनी तरीके से खरीदी गई प्रॉपर्टी का उपयोग कर कमाया गया कोई भी फायदा PMLA के दायरे में अपराध माना जाएगा.
ये भी भी अपराध की श्रेणी में
कोर्ट ने कहा कि बिना KYC और कानूनी दस्तावेजों के बेटिंग प्लेटफॉर्म के लिए मास्टर और क्लाइंट लॉगिन ID हासिल करना या लोगों में बांटना, जालसाजी, धोखाधड़ी, पहचान छुपाने वाले अपराध और क्रिमिनल कंसपिरेसी की श्रेणी में आता है. इसलिए इन ID का उपयोग करके अप्रत्यक्ष रूप से कमाया गया कोई भी मुनाफा अपराध की कमाई माना जाएगा.
ईडी के अटैचमेंट ऑर्डर को दी वैधता
यह फैसला उन याचिकाओं पर दिया गया, जिनमें आरोपी पक्ष ने ED द्वारा जारी प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (POA) को चुनौती दी थी. मामला 2015 के एक इंटरनेशनल क्रिकेट बेटिंग नेटवर्क से जुड़ा है, जिसमें एक आरोपी ने लगभग 2.4 करोड़ रुपए में मास्टर एवं क्लाइंट ID खरीदी थीं और भुगतान हवाला के जरिए विदेश में किया गया था. ED ने छापेमारी के दौरान संदिग्ध दस्तावेज, कीमती सामान और 10 लाख रुपए नकद जब्त किए थे. बाद में एजेंसी ने लगभग 20 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच की, जिसे अवैध सट्टेबाजी ऑपरेशन से जुड़ी कमाई बताया गया.
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याचिकाकर्ताओं की दलील खारिज
वहीं याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि क्योंकि क्रिकेट सट्टेबाजी PMLA में अनुसूचित अपराध नहीं है, इसलिए उनकी संपत्ति को अपराध की कमाई नहीं माना जा सकता, लेकिन HC ने कहा कि अगर कोई गतिविधि सीधे शेड्यूल में शामिल अपराध न भी हो, लेकिन वह अवैध संपत्ति या पहले किए गए अपराधों से जुड़ी हुई है, तो उससे होने वाला लाभ PMLA के तहत अपराध माना जाएगा.
कोर्ट ने कहा कि PMLA की धारा 2(1)(u) बेहद व्यापक है. यह न केवल अपराध से सीधे मिलने वाले लाभ को शामिल करती है, बल्कि, गैर-कानूनी संपत्ति के इस्तेमाल, ट्रांसफर या उससे दोबारा हासिल हुए किसी भी मुनाफे को भी अपराध की कमाई की श्रेणी में रखती है.

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