गायत्री महायज्ञ एवं प्रज्ञा पुराण कथा में उमड़ी भीड़
संस, जागरण, कुल्टी : कुल्टी के बिड़ला रोड स्थित श्रीमान सरोवर यज्ञों पवित्र पंचवटी महामाया नवदुर्गा मंदिर परिसर में आयोजित चार दिवसीय गायत्री महायज्ञ एवं श्रीमद् प्रज्ञा पुराण कथा के दूसरे दिन रविवार को आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुए। पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा। इस अवसर पर शांतिकुंज, हरिद्वार से आइ कथा वाचिका लता जायसवाल ने श्रीमद् प्रज्ञा पुराण कथा पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि प्रज्ञा पुराण कुल चार खंडों में विभाजित हैं और प्रत्येक खंड में सात-सात अध्याय हैं। कथा के माध्यम से उन्होंने कहा कि सद्गुणों को जीवन में उतारने से ही मनुष्य को सत्संग का परम सुख प्राप्त होता है। मनुष्य का सबसे बड़ा ज्ञान यह है कि वह अपने भीतर के अज्ञान, कमियों और बुराइयों को सही रूप में पहचान सके। ईश्वर से मिलने का सबसे सरल मार्ग अपनी बुराइयों का त्याग करना है। जब मनुष्य सभी अवगुणों को छोड़ देता है, तो स्वतः ही ईश्वर से उसका मिलन हो जाता है और उसके सभी दुखों का निवारण हो जाता है। उन्होंने सत्संग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि लोग सत्संग में आते-जाते रहते हैं, किंतु सत्संग में प्राप्त सद्विचारों को जीवन में अपनाना अत्यंत आवश्यक है। जिस प्रकार कल्पवृक्ष के सान्निध्य से दरिद्रता का नाश होता है, उसी प्रकार सत्संग ज्ञान का सरोवर और सुखों की खान है। कथा के दौरान उन्होंने भक्त शिरोमणि शबरी एवं विदुरानी के उदाहरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि सच्चे मन से किए गए सत्संग से भगवान स्वयं भक्तों के पास आते हैं। माता शबरी के घर भगवान श्रीराम और विदुरानी के यहां भगवान श्रीकृष्ण का आगमन इसका प्रमाण है। उन्होंने कहा कि भगवान तभी सहारा देते हैं जब मनुष्य सद्गुणों को धारण करता है। कार्यक्रम को सफल बनाने में गोविंद प्रसाद गुप्ता, मुन्ना शर्मा, रामनाथ राय, धर्मराज पाण्डेय, चंदन गुप्ता सहित समस्त कुल्टीवासियों की सराहनीय भूमिका रही। |
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