इलाज के नाम पर 17 लाख की उगाही।
संवाद सूत्र, अयोध्या। हृदय रोग के इलाज के नाम पर लाखों रुपये की उगाही और संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मरीज की मौत के मामले में न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। एफटीसी सीनियर डिवीजन/एसीजेएम ने आरोप प्रथम दृष्टया सही पाते हुए हर्षण हृदयरोग संस्थान के चिकित्सक डॉ. अरूण जायसवाल और सहारा अस्पताल लखनऊ के चिकित्सक डा. विजय पाण्डेय को लापरवाही, उपेक्षापूर्ण कार्य सहित गंभीर धाराओं में तलब किया है।
मामला इलाज के दौरान मरीज की मृत्यु से जुड़ा है। परिवादी के अधिवक्ता मनोज कुमार सिंह के अनुसार अमरनाथ अग्रवाल के पिता राघवेंद्र कुमार अग्रवाल का इलाज सिविल लाइंस स्थित दिव्य हास्पिटल में शुगर, थायराइड और हार्निया की बीमारी के लिए चल रहा था।
चार सितंबर 2020 को हार्ट की समस्या बता कर उन्हें हार्ट स्पेशलिस्ट से दिखाने की सलाह दी गई। मरीज जब रीडगंज स्थित हर्षण हृदय संस्थान पहुंचे तो डाक्टर अरुण जायसवाल ने कोविड काल का हवाला देकर मरीज को देखने से इनकार कर दिया।
सहारा हॉस्पिटल लखनऊ रेफर करते हुए अपनी पहचान के डाक्टर विजय पांडेय से मिलने की सलाह दी। सहारा हास्पिटल में डाक्टर विजय पांडेय ने कई जांचें कराईं, जो सामान्य आईं। इसके बावजूद हार्निया के आपरेशन की सलाह दी गई।
ऑपरेशन और इलाज के नाम पर ढाई लाख रुपये, फिर पांच लाख रुपये कैश में वसूले गए। आपरेशन के बाद मरीज तीन दिन तक वेंटिलेटर पर रहा। इसके बाद लीवर की जांच के नाम पर सात लाख रुपये और लिए गए। कुल मिला कर लगभग 17 लाख रुपये कैश में वसूल किए गए।
पैसे हुए खत्म तो बदला वार्ड, फिर किया जबरन डिस्चार्ज
अधिवक्ता मनोज सिंह ने बताया कि इलाज के दौरान मरीज की हालत बिगड़ती चली गई। किडनी फेल हो गई, प्लेटलेट्स बेहद कम हो गईं। धनाभाव बताने पर मरीज को मेडिकल आईसीयू से सर्जिकल आइसीयू में शिफ्ट कर दिया गया। 26 सितंबर 2020 को जबरन डिस्चार्ज कर दिया गया।
राहत न मिलने पर मेदांता अस्पताल में इलाज चला, लेकिन 18 अक्टूबर 2020 को मरीज की मृत्यु हो गई। परिवादी ने स्थानीय पुलिस, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक व अन्य अधिकारियों से घटना की शिकायत की।
कार्रवाई न होने पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया गया। सुनवाई के दौरान डॉ. अरुण जायसवाल और डॉ. विजय पाण्डेय को समन जारी कर 10 फरवरी 2026 को हाजिर होने का आदेश दिया है। |
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