Delhi HC
विनीत त्रिपाठी, नई दिल्ली। नीट-यूजी के एक छात्र की याचिका को स्वीकार करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि उच्च या प्रोफेशनल शिक्षा पाने का अधिकार किसी व्यक्ति का मौलिक अधिकार है और इसे कम करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता छात्र हर्षित अग्रवाल को कालेज में उसकी मेरिट के आधार पर एडमिशन दिया गया था और अगर इसे रद किया जाना है, तो इसके लिए कुछ वैध, वास्तविक और ठोस कारण होने चाहिए।
कोई प्रथम दृष्टया निष्कर्ष नहीं हो सकता
पीठ ने कहा कि केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) ने भी माना है कि याची हर्षित अग्रवाल आरोपित नहीं बल्कि केवल एक गवाह था। इससे स्पष्ट होता है कि उसके द्वारा किसी भी कदाचार करने का कोई प्रथम दृष्टया निष्कर्ष नहीं हो सकता। पीठ ने कहा कि नीट-यूजी की प्रवेश परीक्षा पास करके याचिकाकर्ता को जो कीमती अधिकार मिला है, उसे सुरक्षित करने की जरूरत है, क्योंकि दाखिला रद करने और याचिकाकर्ता का नाम एमबीबीएस पाठ्यक्रम से हटाने का कदम पूरी तरह से गलत वजहों से उसकी पढ़ाई में रुकावट डाल रहा है। उक्त टिप्पणी के साथ अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे हर्षित अग्रवाल को करिकुलम के हिसाब से अपनी एमबीबीएस क्लास जारी रखने दें।
छात्रों की लिस्ट में शामिल किया गया
हर्षित अग्रवाल ने पांच मई 2024 को हुई नीट-यूजी 2024 परीक्षा दी थी। उसे ओडिशा के बालांगीर स्थित भीमा भोई मेडिकल काॅलेज और हाॅस्पिटल में एमबीबीएस पाठ्यक्रम में दाखिला मिला था। उसे आलल इंडिया रैंक 28,106 और जनरल श्रेणी रैंक 11,234 मिली थी। याचिकाकर्ता ने याचिका में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए)को उसे एमबीबीएस क्लास में शामिल होने का निर्देश देने की मांग की थी। याचिकाकर्ता ने कहा कि उसके पक्ष में भी वैसा ही आदेश जारी किया जाए जैसा कि एक दूसरे छात्र को दिया गया था। जिसे उसके साथ ही एमबीबीएस पाठ्यक्रम से निकाले गए छात्रों की लिस्ट में शामिल किया गया था।
पहले ही आरोप पत्र दायर किया
याचिकाकर्ता को पेपर लीक मामले में सीबीआई द्वारा जांच के बाद नाम हटा दिए गए थे। हर्षित ने तर्क दिया था कि संदिग्ध की सूची में होने के बावजूद भी दूसरे उम्मीदवार को सुप्रीम कोर्ट ने उसे अपनी पढ़ाई जारी रखने और सेमेस्टर परीक्षा में बैठने की अनुमति दी थी। सीबीआई ने परीक्षा में अनियमितताओं के संबंध में हर्षित अग्रवाल को भी समन भेजा था।
हालांकि, उसने एनटीए के कारण बताओ नोटिस का जवाब दिया, लेकिन उसका स्कोरकार्ड वापस ले लिया गया। इसके बाद कालेज ने उसका दाखिला रद कर दिया। सीबीआई ने तर्क दिया कि इस मामले में पहले ही आरोप पत्र दायर किया जा चुका है और याची आरोप पत्र में आरोपित नहीं था और उसे केवल गवाह के रूप में नामित किया गया था।
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