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सिविल सर्जन से मिलकर शिकायत करते प्रसूता के स्वजन। जागरण
अमरेन्द्र तिवारी, मुजफ्फरपुर । जिले की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की हालत लगातार सवालों के घेरे में है। माडल अस्पताल में मरीजों के इलाज को लेकर सौदेबाजी के मामले की जांच चल ही रही है कि मड़वन पीएचसी से एक और मामला सामने आया है।
यहां से प्रसूता को रेफर किए जाने के बाद एंबुलेंस चालक ने उसे एसकेएमसीएच के बजाय निजी अस्पताल पहुंचा दिया। वहां इलाज के नाम पर 45 हजार रुपये का बिल थमा दिया गया। भुगतान नहीं करने पर मरीज को बंधक बना लिया गया।
रोज ठगे जा रहे गरीब, अधिकारी खेल रहे रिपोर्ट-रिपोर्ट का खेल
मुजफ्फरपुर । जिले में प्रशासनिक व्यवस्था पर झोलाछाप डाक्टर भारी पड़ते नजर आ रहे हैं। गरीब मरीजों के शोषण की शिकायतें रोज सामने आ रही हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी केवल जांच की जा रही है, कहकर मामला टाल रहे हैं।
जिले के लगभग हर पीएचसी से इलाज में लापरवाही की शिकायतें नियमित रूप से आ रही हैं। एसकेएमसीएच से मरीजों को निजी अस्पतालों में पहुंचाने का खेल भी जारी है।
बीते तीन दिनों में ऐसे तीन मामले सामने आए हैं। पहला मामला सदर अस्पताल से जुड़ा है, जहां इलाज के लिए पहुंचे एक मरीज से जांच के नाम पर 2700 रुपये की मांग की गई।
1500 रुपये पर बात नहीं बनने के बाद स्वजन मरीज को लेकर निजी अस्पताल चले गए। इस मामले में अस्पताल अधीक्षक जांच कराने की बात कह रहे हैं। दूसरी घटना मीनापुर की है। एक मरीज को एसकेएमसीएच में भर्ती कराया गया, लेकिन समय पर आपरेशन नहीं हुआ। इलाज की आस में मरीज ने दम तोड़ दिया। इस मामले में भी वरीय अधिकारी केवल जांच की बात कह रहे हैं।
तीसरा मामला हथौड़ी से सामने आया है। रागिनी देवी की गर्भाशय में गांठ के आपरेशन के दौरान मौत हो गई। स्वजन का आरोप है कि उसे चौकी पर लिटाकर ऑपरेशन की तैयारी की जा रही थी और बेहोश करने के दौरान ही उसकी मौत हो गई। इस मामले में स्थानीय पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने चुप्पी साध रखी है।
सिविल सर्जन का कहना है कि मामले की जांच कराई जा रही है और पीएचसी प्रभारी से रिपोर्ट मांगी गई है। इस बीच चौथा मामला शनिवार को मडवन के बड़का गांव निवासी उमाशंकर सहनी सिविल सर्जन के पास शिकायत लेकर पहुंचे।
उन्होंने बताया कि एक जनवरी को वह अपनी पुत्री सोनी को प्रसव के लिए मडवन पीएचसी लेकर गए थे। सुबह करीब साढ़े आठ बजे वहां तैनात चिकित्सक ने डिलीवरी संभव न होने की बात कहकर एसकेएमसीएच रेफर कर दिया। इसके बाद पीएचसी से निकली एंबुलेंस रास्ते में ही मरीज को एक निजी अस्पताल पहुंचा गई, जहां फीस के लिए उसे बंधक बना लिया गया।
इस मामले में भी सिविल सर्जन ने रिपोर्ट मांगे जाने की बात कही। आंकड़ों के अनुसार जिले में 575 निबंधित अस्पताल हैं, जबकि आरोप है कि तीन हजार से अधिक अस्पताल और अल्ट्रासाउंड केंद्र अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं। इनकी जांच और कार्रवाई अब तक केवल दिखावा साबित हो रही है।
सुनीता की मौत के बाद दिखी थी सक्रियता, फिर सब हो गया हवा-हवाई
मुजफ्फरपुर : जिले में झोलाछाप डाक्टरों का जाल शहर से लेकर गांव-बाजार तक फैला है। गरीब मरीजों का शोषण और गलत इलाज के कारण मौत के मामले सामने आते रहे हैं, लेकिन कार्रवाई कागजों तक सिमट जाती है।
पिछले दो वर्षों में सकरा प्रखंड की सुनीता का मामला इसका बड़ा उदाहरण है। गर्भाशय के आपरेशन के बाद उसकी दोनों किडनियां निकाल दिए जाने से हड़कंप मचा था। जिला प्रशासन, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम बनी, छापेमारी भी हुई, लेकिन सुनीता की मौत के बाद जांच की फाइल एक तरह से दफन हो गई।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिला स्तर पर टीम गठित है और सभी पीएचसी प्रभारियों को अपने-अपने क्षेत्र में भ्रमण कर झोलाछाप क्लीनिकों की जांच करने और प्राथमिकी दर्ज कराने की जिम्मेदारी दी गई है।
सिविल सर्जन डा. अजय कुमार ने कहा कि पीएचसी स्तर पर जांच की जिम्मेदारी प्रभारियों को दी गई है और झोलाछाप के खिलाफ कार्रवाई लगातार चल रही है। एसकेएमसीएच क्षेत्र में एक दर्जन नर्सिंग होम पर प्राथमिकी दर्ज की गई है और सभी पीएचसी क्षेत्रों में कार्रवाई जारी है। |
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