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जम्मू-कश्मीर में जनगणना 2027 की तैयारी तेज। सांकेतिक फोटो
राज्य ब्यूरो, जम्मू। जम्मू-कश्मीर में जनगणना 2027 की तैयारियां तेज हो गई हैं। केंद्र शासित प्रदेश स्तर की जनगणना समन्वय समिति जल्द ही हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन के लिए 30 दिनों की समय-सीमा तय करने वाली है। यह एक अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 के बीच हो सकती है।
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए जनगणना संचालन निदेशक एवं नागरिक पंजीकरण निदेशक अमित शर्मा ने बताया कि जम्मू-कश्मीर में हाउस लिस्टिंग आपरेशन की समय-सीमा को लेकर जल्द निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जनगणना समन्वय समिति एक अप्रैल से 30 सितंबर 2026 के बीच किसी भी 30 दिनों की अवधि तय करेगी।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि लद्दाख में हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन एक जून से 30 जून 2026 तक किया जाएगा। केंद्रशासित प्रदेश स्तर की जनगणना समन्वय समिति की अध्यक्षता मुख्य सचिव अटल डुल्लू कर रहे हैं। समिति की आगामी बैठक में हाउस लिस्टिंग आपरेशन की 30 दिनों की अवधि को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है।
अमित शर्मा ने बताया कि हाउस लिस्टिंग आपरेशन जनगणना की पहली चरण (फेज-1) की प्रक्रिया है। इसके बाद दूसरे चरण (फेज-2) के तहत जनसंख्या गणना की जाएगी।
उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के बर्फबारी वाले क्षेत्रों में जनसंख्या गणना सितंबर 2026 में होगी, जबकि मैदानी इलाकों में यह प्रक्रिया फरवरी 2027 में पूरी की जाएगी।उन्होंने आगे बताया कि लद्दाख को बर्फबारी वाला क्षेत्र मानते हुए वहां जनसंख्या गणना सितंबर 2026 में कराई जाएगी।
जम्मू-कश्मीर के लिए यह जनगणना दो अहम कारणों से महत्वपूर्ण है। पहला इससे आरक्षित वर्गों की वास्तविक जनसंख्या का पता चलेगा। दूसरा यही जनगणना भविष्य में विधानसभा और लोकसभा सीटों के परिसीमन का आधार बनेगी।
इस जनगणना में पहली बार पड्डरी, गड्डा ब्राह्मण और कोली जनजातियों को अलग-अलग जनजातियों के रूप में गिना जाएगा। इन जनजातियों को 2024 में जम्मू-कश्मीर की अनुसूचित जनजाति (एसटी) सूची में शामिल किया गया था।
इसके अलावा, जम्मू-कश्मीर में पहली बार अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित आंकड़े भी जनगणना के जरिए सामने आएंगे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में केंद्रीय सूची में 20 और राज्य (केंद्रशासित प्रदेश) सूची में 41 जातियां/समुदाय ओबीसी के रूप में शामिल हैं।
जम्मू-कश्मीर में ओबीसी वर्ग को सरकारी नौकरियों में आठ प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलता है।सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही भविष्य में केंद्रशासित प्रदेश में निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन किया जाएगा।
जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के अनुसार, 2026 के बाद पहली जनगणना के आंकड़े जारी होने तक विधानसभा और लोकसभा सीटों में किसी तरह का पुनर्समायोजन नहीं किया जा सकता।उल्लेखनीय है कि जम्मू-कश्मीर में पिछला परिसीमन अभ्यास 5 मई 2022 को पूरा हुआ था। |
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