नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के प्रबंधन से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान साफ कहा कि अगर किसी महिला को कुत्तों को खाना खिलाने के कारण मारपीट, छेड़छाड़ या अपमानजनक टिप्पणियों का सामना करना पड़ता है, तो वह थाने में एफआईआर दर्ज करा सकती है या जरूरत पड़ने पर हाई कोर्ट में राहत मांग सकती है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे अपमानजनक बयान और टिप्पणियां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में नहीं आतीं।
सुनवाई के दौरान एनिमल राइट्स संगठन की ओर से पेश वकील महालक्ष्मी पावनी ने बताया कि कुत्तों को खाना देने वाली कई महिलाओं के साथ मारपीट और छेड़छाड़ की घटनाएं हुई हैं। सोशल मीडिया पर उन्हें “कुत्तों के साथ सोने वाली” जैसी अशोभनीय और अपमानजनक टिप्पणियां की गईं। कोर्ट ने इन आरोपों पर गंभीरता दिखाई और कहा कि अगर किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचती है, तो वह पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकती है।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि वह हर व्यक्तिगत शिकायत पर सुनवाई नहीं कर सकता। कोर्ट का मुख्य मुद्दा आवारा कुत्तों के प्रबंधन, उनकी सुरक्षा और जनता की सुरक्षा से जुड़ा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह सुनवाई कुत्तों के साथ क्रूरता या हमलों के वीडियो के मुकाबले में नहीं बदली जा सकती।
डॉग राइट्स एक्टिविस्टों की ओर से वरिष्ठ वकील राज शेखर राव ने कोर्ट से आग्रह किया कि वे कुछ वीडियो देखें, जिनमें कुत्तों के साथ दुर्व्यवहार दिख रहा है। लेकिन, कोर्ट ने इन वीडियो को देखने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इंटरनेट पर ऐसे अनगिनत वीडियो मौजूद हैं, जिनमें कुत्ते बच्चों और बुजुर्गों पर हमला करते दिखते हैं। कोर्ट नहीं चाहता कि मामला वीडियो के मुकाबले में बदल जाए।
वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि कोर्ट को इस मामले में विशेषज्ञों की राय लेनी चाहिए। उन्होंने अरावली केस का हवाला देते हुए कहा कि उस मामले में समिति में ज्यादातर नौकरशाह थे, इसलिए दोबारा विचार करना पड़ा। उन्होंने चेतावनी दी कि इस केस में भी ऐसी स्थिति नहीं बननी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को तय की है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आवारा कुत्तों के प्रबंधन पर केंद्र और राज्य सरकारों से ठोस सुझाव मांगे हैं।

Deshbandhu
Supreme Courtpoliticsdelhi newsDogs In Delhi
Next Story |