नई दिल्ली। ईरान की संसद के अध्यक्ष ने रविवार को चेतावनी दी कि अगर अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी पर इस्लामिक गणराज्य पर हमला करता है, तो अमेरिकी सेना और इजरायल पर वैध निशाना होंगे। मोहम्मद बगेर कालिबाफ की टिप्पणियों से संकेत मिलता है कि उन्होंने ईरान पर हमले के बाद संभावित निशानों की सूची में इस्राइल को भी शामिल किया है।
कट्टरपंथी नेता कालिबाफ ने यह धमकी तब दी जब ईरानी संसद में सांसद 'अमेरिका मुर्दाबाद' के नारे लगाते हुए मंच पर चढ़ गए। गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के लिए अपनी योजना के बारे में एक बड़ा संकेत दिया है। अमेरिकी सेना ने रविवार को उन्हें ईरान पर हमले के संभावित विकल्पों के बारे में जानकारी दी।
इस्लामिक शासन की वैधता को चुनौती
ईरान में दिसंबर 2025 के अंत से शुरू हुए आर्थिक संकट के खिलाफ होने वाले प्रदर्शन अब एक व्यापक राजनीतिक आंदोलन का रूप ले चुका है। शुरूआती विरोध महंगाई, बेरोजगारी और ईरान मुद्रा के गिरते वैल्यू को लेकर था, लेकिन अब यह सीधे इस्लामिक शासन की वैधता को चुनौती दे रहा है।
ईरान में 78 मौतों की पुष्टि
विभिन्न मानवाधिकार संगठनों ने लगभग 78 लोगों की मौत की पुष्टि की है, जिनमें 50 प्रदर्शनकारी और 15 सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। हालांकि अंतरराष्ट्रीय मीडिया के अनुसार, इस संख्या से कहीं अधिक मौतें हुई हो सकती हैं। केवल तेहरान के कुछ अस्पतालों में ही एक रात में सैकड़ों घायल और मृतकों के मामले दर्ज हुए हैं।
स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए ईरान सरकार ने 7 जनवरी से देशभर में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद कर दी हैं। बावजूद इसके, विरोध तेहरान, तबरेज़, मशहद और कुर्दिश इलाकों समेत 100 से ज्यादा शहरों में फैल चुका है।
प्रदर्शनकारियों पर विदेशी ताकतों के साथ पकड़ होने का आरोप
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों पर विदेशी ताकतों के साथ पकड़ होने का आरोप लगाया है। वहीं अटॉर्नी जनरल ने चेतावनी दी है कि विरोध में शामिल लोगों को “भगवान का दुश्मन” मानते हुए मौत की सजा दी जा सकती है।
अमेरिका की प्रतिक्रिया ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरानी जनता की मदद का आश्वासन दिया है, जबकि विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है। ईरानी मीडिया ने विदेशी साजिश का आरोप लगाते हुए सैकड़ों गिरफ्तारियों की बात कही है।

National Desk
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