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बिहार में एक किसान के पास 3.11 लाख एकड़ जमीन! सहकारिता विभाग की जांच में बड़ा खुलासा

deltin33 2026-1-11 11:27:13 views 1161
  



अरविंद कुमार सिंह, जमुई। धान खरीद में किसानों द्वारा वास्तविक रकबे से कई गुना अधिक भूमि दर्शाने के मामलों की जांच में एक हैरान कर देने वाला तथ्य सामने आया है। लक्ष्मीपुर प्रखंड के काला गांव निवासी रामदयाल मांझी कागजों में 3.11 लाख एकड़ जमीन का स्वामी निकले, जो कि जमुई जिले के कुल रकबे का लगभग आधा है।

बड़ी बात यह है कि रामदयाल की मृत्यु वर्षों पूर्व हो चुकी है। उनके नाम की फर्जी रसीद किसी उषा देवी पति रामबरन साह के नाम धान बेचने के लिए अपलोड आवेदन के साथ संलग्न किया गया है। अब ढूंढने से भी उषा देवी का कोई पता ठिकाना नहीं मिलने से मामला और पेचीदा हो गया है तथा फर्जीवाड़ा की डोर लंबी होती चली जा रही है।

यह सब खुलासा सहकारिता विभाग द्वारा की जा रही प्रारंभिक जांच में हुआ है। धान बिक्री के लिए किए गए आवेदन के साथ रामदयाल मांझी की जो ऑनलाइन भूमि रसीद संलग्न की गई है, उसमें खाता संख्या 198, खेसरा शून्य तथा कुल रकबा 3,11,113 एकड़ दर्ज है। यह आंकड़ा जिले के कुल कृषि रकबे (लगभग छह लाख एकड़) के आधे से अधिक है।

ऑनलाइन रसीद में वर्ष 1969-70 तक लगान वसूली का उल्लेख है। रसीद के अनुसार जमाबंदी पंजी के पृष्ठ संख्या 25 पर जमाबंदी संख्या 28 दर्ज है, जबकि कंप्यूटरीकृत जमाबंदी संख्या 198152900007605 अंकित है। सहकारिता विभाग की जांच में यह स्पष्ट हो गया है कि किसी अन्य व्यक्ति ने रामदयाल मांझी के नाम पर फर्जी रसीद बनाकर फर्जी आवेदन अपलोड किया है।

रामदयाल अब इस दुनिया में नहीं हैं और ना ही उनके तीनों पुत्र। उनके 50 वर्षीय पौत्र पूरन मांझी को ऐसी किसी रसीद, जमीन या फिर आवेदन की कोई जानकारी नहीं है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का सर्वर डाउन होने के कारण आनलाइन रसीद की सत्यता की जांच अभी पूरी नहीं हो पाई है।
जागरण की खबर पर निबंधक ने लिया संज्ञान, चल रही जांच

सात जनवरी को दैनिक जागरण में प्रकाशित ‘1.67 लाख एकड़ में धान की रोपनी, किसानों ने काटी 62 लाख एकड़ पर फसल’ शीर्षक खबर को सहकारिता विभाग राज्य मुख्यालय ने गंभीरता से लिया है।

सहयोग समितियां के निबंधक रजनीश कुमार सिंह ने प्रकाशित खबर के आलोक में वरीय पदाधिकारियों की टीम गठित कर मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश जारी कर दिया है।

इसके बाद जिलाधिकारी द्वारा कराई जा रही जांच में चौंकाने वाला उक्त तथ्य सामने आया है। जिला सहकारिता पदाधिकारी हरेंद्र प्रसाद ने बताया कि मामले की जांच अभी जारी है।
भूमिहीन भी बेच रहे बड़ी मात्रा में धान

लक्ष्मीपुर प्रखंड अंतर्गत ही नजारी पैक्स ने फर्जीवाड़ा में पिडरौन को भी पीछे छोड़ दिया है। यहां भूमिहीन किसान से भी बड़ी मात्रा में धान की खरीद हुई है इसके अलावा पैक्स की किसानों से धान खरीद में भाई, भतीजा और रिश्तेदारों को विशेष तवज्जो मिल रही है।

उक्त समिति के अध्यक्ष श्यामसुंदर दास के भाई परमेश्वर दास को करीब तीन एकड़ जमीन उपलब्ध है। उनसे धान की खरीद 160 और 90 क्विंटल, उनके पुत्र शशि कुमार से दो अलग-अलग तारीख में 130 तथा 120 मिलाकर ढाई सौ क्विंटल, परमेश्वर दास के एक और पुत्र पंकज कुमार से 149 और 86 क्विंटल तथा उनके ही पुत्र निरंजन कुमार से 150 क्विंटल और 96 क्विंटल तथा परविंद कुमार से 90 क्विंटल धान की खरीद हुई। अर्थात तीन एकड़ जमीन के रैयत परिवार को 1000 क्विंटल धान का उत्पादन हुआ जो अविश्वसनीय ही नहीं असंभव भी प्रतीत होता है।

पैक्स अध्यक्ष के पुत्र धीरज कुमार से भी दो बार में ढाई सौ क्विंटल, सीताराम दास के पुत्र अमरजीत कुमार तथा बिट्टू कुमार से 246 क्विंटल तथा 240 क्विंटल और उनकी पत्नी अशोगा देवी से 190 क्विंटल धान की खरीद बहुत कुछ बयां कर रही है।

अमरजीत अध्यक्ष का रिश्ते में भांजा है। इसी प्रकार नरेश दास के परिवार से 532 क्विंटल धान खरीदारी की कहानी कम रोचक नहीं है।
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