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सांकेतिक तस्वीर।
अशोक केडियाल, जागरण, देहरादून। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) की ओर से तैयार राज्य पाठ्यचर्या रूपरेखा (स्टेट करिकुलम फ्रेमवर्क) में बड़ा बदलाव किया गया है। अब कक्षा नौ और 10 में गणित विषय को सभी विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य किया गया है।
हालांकि, विद्यार्थियों की रुचि और क्षमता के दृष्टिगत गणित के मूल्यांकन को दो स्तर पर विभाजित किया गया है। जिन विद्यार्थियों की गणित में विशेष रुचि नहीं है, उनके लिए सामान्य स्तर का विकल्प उपलब्ध रहेगा, जबकि उच्च स्तर उन छात्रों के लिए होगा जो गणित में आगे अध्ययन करना चाहते हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) के तहत राज्य पाठ्यचर्या में यह बदलाव शामिल किया गया है। एससीईआरटी की निदेशक ने इसकी पुष्टि की।
राज्य पाठ्यचर्या की अनुशंसा के अनुरूप पाठ्यपुस्तकों में स्थानीय संदर्भों को भी शामिल किया जाएगा। इससे विद्यार्थियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयवस्तु के साथ-साथ राज्य से जुड़ी सामाजिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक जानकारियों के अध्ययन का अवसर मिलेगा। इसका उद्देश्य शिक्षा को अधिक प्रासंगिक और जीवनोपयोगी बनाना है।
राज्य पाठ्यचर्या रूपरेखा में विद्यालय संस्कृति पर चिंतन जरूरी
एससीएफ के राज्य समन्वयक रविदर्शन तोपाल के अनुसार राज्य पाठ्यचर्या रूपरेखा में विद्यालय संस्कृति, प्रक्रिया और शिक्षकों की भूमिका को लेकर भी व्यापक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। शिक्षकों को सक्षम और सशक्त बनाने, समुदाय एवं परिवार की भागीदारी बढ़ाने तथा विद्यालय को एक समग्र शिक्षण केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए कई अनुशंसाएं की गई हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की अन्य अनुशंसाओं पर भी चर्चा जारी है। राष्ट्रीय अध्यापक व्यावसायिक मानक (एनपीएसटी) के उद्देश्य शिक्षकों की भूमिका, आवश्यक दक्षता और उनके प्रदर्शन के मूल्यांकन के लिए एक साझा और मानकीकृत ढांचा तैयार करना है, जिससे शिक्षण गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों तक ले जाया जा सके।
- बंदना गर्ब्याल, निदेशक एससीईआरटी
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